सरकार के नए विधेयक पर विपक्ष का विरोध, भाजपा ने दिया करारा जवाब

BJP

देश में हर समय किसी न किसी मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं। जब भी सदन में पक्ष या विपक्ष कोई भी बिल पेश करता है तो उसे पर बहस होना आम बात है। मगर कई बार यह बहस विकराल रूप ले लेती है। आपको बता दे की लोकसभा में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब विपक्षी सांसदों ने सरकार द्वारा पेश किए गए तीन अहम विधेयकों पर कड़ा विरोध जताया। इन विधेयकों में यह प्रावधान किया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर आरोपों के चलते 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहता है तो उसे अपने पद से हटना पड़ेगा। जिसे लेकर आज लोकसभा में खूब हंगामा हुआ।

विपक्ष का विरोध और भाजपा का पलटवार

विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया और सदन के भीतर जमकर नारेबाज़ी की। इस दौरान भाजपा सांसदों का आरोप है कि विपक्षी सदस्यों ने गुस्से में गृह मंत्री अमित शाह की ओर फाड़े हुए कागज़ तक फेंके। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक करार देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कड़ी कार्रवाई की मांग की।केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि विपक्ष जिन बिलों का विरोध कर रहा है, वही आज की राजनीतिक परिस्थितियों में सबसे अधिक जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेता गिरफ्तारी के बाद भी इस्तीफा नहीं देते और जेल से ही कामकाज चलाने की कोशिश करते हैं। प्रधान ने सवाल किया कि क्या यह संविधान की भावना के अनुरूप है? उनका कहना है कि यह विधेयक राजनीति में पारदर्शिता और नैतिकता बनाए रखने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

विपक्ष पर भाजपा का सीधा हमला

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्षी हंगामे को भ्रष्टाचारियों के बचाव से जोड़ा। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा यही है कि विपक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ है या उसके साथ खड़ा है। ठाकुर ने दावा किया कि भाजपा और एनडीए साफ-सुथरी राजनीति चाहते हैं, जबकि विपक्ष भ्रष्ट नेताओं की ढाल बना हुआ है। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी बिलों का समर्थन करते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार मिटाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद सदन की मर्यादा तोड़कर वेल में उतर आए और गृह मंत्री के नज़दीक जाकर नारेबाज़ी की। उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई गंभीर अप्रिय घटना भी हो सकती थी। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।जहां भाजपा और सहयोगी दल इन विधेयकों को राजनीति में शुचिता लाने वाला मान रहे हैं, वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार का मकसद विपक्ष को कमजोर करना और लोकतांत्रिक ढांचे को चोट पहुंचाना है। इस बीच, आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने सुझाव दिया है कि इन बिलों को बेहतर समीक्षा के लिए संसदीय संयुक्त समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

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