दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से चली आ रही बाधा को दूर करते हुए अब दिल्ली सरकार अपना अलग इंजीनियरिंग विभाग स्थापित करने जा रही है। इस विभाग में पेशेवर और अनुभवी इंजीनियरों की नियुक्ति की जाएगी, जो केवल दिल्ली की परियोजनाओं पर काम करेंगे।अब तक राजधानी के विकास कार्यों की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से आए इंजीनियरों पर थी। ये अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में तैनात होते थे। कई बार ऐसे इंजीनियर अचानक अपने मूल विभाग में लौट जाते थे, जिससे चल रही परियोजनाएं बीच में रुक जाती थीं और निर्माण कार्यों में देरी होती थी। सरकार का मानना है कि नए विभाग के गठन से यह समस्या स्थायी रूप से खत्म हो जाएगी और विकास योजनाएं तय समय पर पूरी हो पाएंगी।
दिल्ली के लिए समर्पित इंजीनियर
दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के लिए बड़ा फैसला लेते हुए राजधानी दिल्ली में इंजीनियरिंग विभाग स्थापित करने का फैसला लिया।दिल्ली सरकार के नए विभाग में नियुक्त होने वाले इंजीनियर केवल दिल्ली के बुनियादी ढांचे के लिए काम करेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़ी नई इमारतों के निर्माण में अब किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सामुदायिक केंद्रों जैसी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर रहेगा।
हर जिले में बनेगा मिनी सचिवालय
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि सरकार राजधानी के सभी जिलों में मिनी सचिवालय बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे लोगों को सरकारी कामकाज के लिए बार-बार मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा और जिला स्तर पर ही सुविधाएं उपलब्ध होंगी।दिल्ली में इंजीनियरों के लिए पहले से ही 3214 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केंद्र पर निर्भरता के कारण बार-बार कठिनाइयां सामने आती थीं। अब नए इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना से न केवल रिक्त पदों को भरा जाएगा बल्कि सभी निर्माण कार्यों को तेज़ी और कुशलता से अंजाम दिया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि इस फैसले से राजधानी के विकास कार्यों में नई ऊर्जा आएगी और दिल्ली को शानदार शहर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठेंगे।
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