इसरो की बड़ी योजनाएं, भारत को अगले तीन वर्षों में तीन गुना बढ़ानी होगी अंतरिक्ष में उपग्रहों की संख्या

ISRO

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने शुक्रवार को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले तीन वर्षों में अपने उपग्रहों की संख्या को तीन गुना तक बढ़ाना होगा, ताकि बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके। फिलहाल अंतरिक्ष में देश के कुल 55 उपग्रह सक्रिय हैं, जो आम जनता की कई तरह की सेवाओं में सहायता कर रहे हैं।वी. नारायणन ने ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम उपलब्धियां, चुनौतियां और भविष्य की दिशा’ विषय पर अपने संबोधन में बताया कि भारत का लक्ष्य है कि 2040 तक वह तकनीक, अंतरिक्ष एप्लिकेशन और आधारभूत संरचना के मामले में दुनिया की अग्रणी शक्तियों में शामिल हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल सेवा आधारित मॉडल पर काम नहीं कर रहा, बल्कि व्यावसायिक संभावनाओं की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।इसरो प्रमुख ने जानकारी दी कि भारत वर्ष 2035 तक अपना पूरा स्पेस स्टेशन विकसित करेगा। इसका पहला मॉड्यूल वर्ष 2028 में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत को आत्मनिर्भर अंतरिक्ष महाशक्ति की श्रेणी में ले जाएगा। इस दिशा में आवश्यक तकनीकी आधार तैयार किया जा रहा है और सरकार ने इसके लिए भारी निवेश की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

चंद्रयान-5 मिशन में जापान के साथ साझेदारी

नारायणन ने खुलासा किया कि इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जैक्सा मिलकर चंद्रयान-5 मिशन, जिसे ‘लूपेक्स’ भी कहा जा रहा है, पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 के लैंडर की तुलना में यह मिशन कहीं अधिक उन्नत होगा। जहां पिछला लैंडर 1,600 किलोग्राम का था, वहीं लूपेक्स मिशन का वजन लगभग 6,600 किलोग्राम होगा। इस प्रोजेक्ट में सैटेलाइट का निर्माण भारत कर रहा है और लॉन्च की जिम्मेदारी जापान निभाएगा।वी. नारायणन ने यह भी जानकारी दी कि इसरो आने वाले तीन महीनों में अमेरिका के एक भारी-भरकम संचार उपग्रह को भारतीय रॉकेट के माध्यम से लॉन्च करेगा। इस उपग्रह का वजन 6,500 किलोग्राम होगा। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्पेस लॉन्च सेवाओं में विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धा की स्थिति और मजबूत होगी।नारायणन ने बताया कि इसरो ने इस साल कुल 12 लॉन्च व्हीकल मिशनों की योजना बनाई है। इनमें नासा और इसरो के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया निसार (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन भी शामिल है, जिसे 30 जुलाई को जीएसएलवी एफ16 रॉकेट के ज़रिए लॉन्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसरो की क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्चपैड विकसित करने की योजना को भी मंजूरी दे दी है, जिसके लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।

गगनयान और वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण में सफलता

इसरो प्रमुख ने बताया कि गगनयान मिशन के तहत भारत अपने पहले अंतरिक्ष यात्रियों को 2027 की पहली तिमाही में अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक इसरो 34 देशों के कुल 433 उपग्रह लॉन्च कर चुका है, जो खुद की अंतरिक्ष तकनीक नहीं रखते। पिछले दस वर्षों में इसरो ने कुल 518 उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किए हैं, जिनमें भारत और अन्य देशों के उपग्रह शामिल हैं।अंतरिक्ष क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए इसरो प्रमुख वी. नारायणन को प्रतिष्ठित जी.पी. बिड़ला स्मारक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। उनका कहना है कि देश की अंतरिक्ष यात्रा अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जिसमें तकनीकी आत्मनिर्भरता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यावसायिक संभावनाएं – तीनों पर एक साथ ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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