नकदी विवाद में जस्टिस वर्मा के आवास में सीसीटीवी कैमरों की जांच, हुआ बड़ा खुलासा

Justice Verma

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड में एक बड़ा खुलासा हुआ है। तीन सदस्यीय जांच समिति को ठोस सबूत मिले हैं कि उनके आधिकारिक आवास से नकदी बरामद हुई थी और इन नोटों को जलाने के बाद सफाई भी की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सफाई उनकी गैरमौजूदगी में उनके निजी सचिव की निगरानी में की गई। साथ ही आपको बता दें कि जांच समिति ने खुलासा किया है कि 15 मार्च की सुबह जस्टिस वर्मा के स्टोर रूम में पड़े आधे जले हुए 500-500 रुपये के नोटों के ढेर को उनके खास कर्मचारियों ने हटाया। उस समय वर्मा दिल्ली से बाहर थे, लेकिन कर्मचारियों ने फोन पर उनसे बात की और फिर यह कार्रवाई की गई। समिति ने पाया कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से हुआ।

राहिल, हनुमान और आरएस कार्की की भूमिका

जांच रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा के सबसे भरोसेमंद कर्मचारियों में से राहिल, हनुमान और निजी सचिव आरएस कार्की ने मिलकर यह काम अंजाम दिया। जब अग्निशमन और पुलिसकर्मी आवास से जा चुके थे, उसी के तुरंत बाद इन कर्मचारियों ने जले हुए नोटों को स्टोर रूम से हटाया। यह सारी प्रक्रिया जज वर्मा की जानकारी और सहमति से हुई, ऐसा रिपोर्ट में उल्लेख है।दिल्ली के 30 तुगलक क्रीसेंट स्थित सरकारी आवास पर 14 मार्च की रात आग लग गई थी। आग लगने की घटना में भंडार कक्ष से जली हुई नकदी बरामद हुई, जो इस पूरे मामले की जड़ बनी। उस समय जज वर्मा शहर से बाहर थे और आगजनी की खबर उनकी बेटी और सचिव ने उन्हें दी थी।बता दे कि समिति ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि जिस भंडार कक्ष से नोट बरामद हुए, वह पूरी तरह से जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के नियंत्रण में था। समिति ने इस आधार पर उनके खिलाफ कदाचार का गंभीर आरोप तय किया और सिफारिश की कि उन्हें पद से हटाया जाए।

जस्टिस वर्मा की दलील

वर्मा ने समिति के समक्ष दलील दी कि भंडार कक्ष उनके निवास का हिस्सा नहीं था और वहां किसी भी व्यक्ति की पहुंच आसानी से हो सकती थी। उन्होंने दावा किया कि वह स्थान केवल अप्रयुक्त वस्तुओं के भंडारण के लिए प्रयोग होता था। साथ ही उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे मौके पर काम नहीं कर रहे थे और यह तकनीकी समस्या उनके नियंत्रण से बाहर थी।हालांकि, समिति ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्मा के पास सीसीटीवी रिकॉर्ड को संरक्षित करने और समय पर जांच कराने का पर्याप्त अवसर था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

घटना के समय मैं मौजूद नहीं थे ,जज वर्मा

वर्मा ने यह भी कहा कि आग लगने के समय वह दिल्ली में नहीं थे और घर में केवल उनकी बेटी और मां मौजूद थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार के किसी भी सदस्य ने नकदी की बोरियां न देखी और न ही उसके बारे में जानकारी दी। बावजूद इसके समिति ने यह स्वीकार नहीं किया कि भंडार कक्ष किसी बाहरी के लिए खुला हो सकता था, खासकर जब कर्मचारी और निजी सचिव उस जगह पर नियमित रूप से नजर रखते थे।

जांच समिति में कौन-कौन शामिल
इस जांच समिति की अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने की, जबकि अन्य दो सदस्य हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन थे। तीनों ने सर्वसम्मति से यह माना कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की जवाबदेही इस मामले में बनती है और उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।

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