देश में 2025 का मानसून सत्र शुरू हो चुका है। मानसून सत्र शुरू होते ही पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर। मानसून सत्र के दौरान पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर कई सवाल को लेकर भीड़ जाते है। जब भी पक्ष और विपक्ष एक दूसरे के सामने आते हैं वह हमेशा एक दूसरे पर किसी न किसी मुद्दे को लेकर सवाल खड़े करते हैं। 2025 का मानसून सत्र शुरू हो चुका है। और इस बार मानसून सत्र में अभी तक ऑपरेशन सिंदूर का मुद्दा सबसे हाइलाइटेड रहा है।बता दे कि ऑपरेशन सिंदूर तब शुरू हुआ जब पहलगाम में कुछ आतंकवादियों ने देश के मासूम लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। जिसके जवाबी कार्रवाई में देश ने ऑपरेशन सिंदूर चला कर दुश्मन देश को करारा जवाब दिया था। अब इसी मुद्दे को लेकर मानसून सत्र के दौरान संसद में रोज बहस बाजी हो रही है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष के लगातार कई सवाल ने बवाल को बढ़ा दिया है।सोमवार को लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारत की विदेश नीति को लेकर बहस के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे थे। जयशंकर जैसे ही विदेश नीति को लेकर अपना पक्ष रख रहे थे, विपक्षी दलों के सांसदों ने शोरगुल शुरू कर दिया। इसी बीच गृहमंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
विदेश मंत्री पर नहीं, पाकिस्तान पर भरोसा
देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार को मानसून सत्र में मौजूद रहे जिस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच अनूप चौक शुरू हो गए। जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि देश के विदेश मंत्री, जो संविधान की शपथ लेकर संसद में बयान दे रहे हैं, उन पर विश्वास करने के बजाय विपक्ष को पाकिस्तान जैसे देश पर अधिक भरोसा है। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर संसद में विदेश मंत्री की बात पर ही भरोसा नहीं किया जाएगा, तो फिर लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा।अमित शाह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को संसद के मंच पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे रवैये के कारण ही विपक्ष 20 साल तक सत्ता से दूर रहने को मजबूर रहेगा।
अमित शाह ने जताई नाराजगी
संसद भवन में हंगामे के बीच एक बार फिर अमित शाह खड़े हुए और विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है, जिस पर शांति और ध्यानपूर्वक चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री जब गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं, तब विपक्ष का इस तरह व्यवधान डालना निंदनीय है। शाह ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जब विपक्ष के नेता सदन में असत्य बातें बोल रहे थे, तब सत्तापक्ष ने संयम रखा। लेकिन अब जब सच बोला जा रहा है, तो विपक्ष उसे सुन नहीं पा रहा।गृहमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विदेश मंत्री को इस गंभीर बहस के दौरान पूरा संरक्षण दिया जाए ताकि वे बिना बाधा के अपनी बात पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि अगर हर वक्त टोकाटाकी होती रही तो न केवल सरकार के मंत्री परेशान होंगे, बल्कि विपक्ष अपने सदस्यों को भी सही दिशा नहीं दे पाएगा। अमित शाह ने दो टूक कहा कि बैठकर हंगामा करना तो सबको आता है, लेकिन गंभीरता से सुनना हर किसी के वश की बात नहीं।
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