बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। जिसे लेकर सभी पार्टी तैयारीयों में जुटी हुई है। फिलहाल बिहार में SIR का मुद्दा सबसे तेज है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े अहम फैसले लिए हैं और जनता को बड़ी सौगात दी है। आपको बता दे की विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधवा पेंशन को बढ़ाया है । इसके अलावा बिहार की महिलाओं और लड़कियों के लिए 35% आरक्षण नियम को भी लागू किया है। वहीं इसके अलावा भी नीतीश कुमार द्वारा कई बड़े फैसले लिए गए हैं। अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक और अहम फैसला लिया है। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अब शिक्षक भर्ती में बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए राज्य में डोमिसाइल नीति को फिर से प्रभावी किया जा रहा है। नीतीश सरकार का यह कदम राज्य के युवाओं को रोजगार देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जो आने वाले चुनावों को देखते हुए भी काफी अहम है।
बिहार के अभ्यर्थियों को मिलेगी वरीयता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षक भर्ती से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए डोमिसाइल नीति को फिर से शामिल किया जाए। इसके तहत केवल बिहार के अधिवासी ही शिक्षक पदों के लिए वरीयता प्राप्त करेंगे। यह नई व्यवस्था TRE-4 (शिक्षक भर्ती परीक्षा-4) और TRE-5 से लागू होगी। संभावना है कि TRE-5 परीक्षा 2026 में आयोजित की जाएगी और उससे पहले राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) का आयोजन भी नियोजित रोडमैप के अनुसार किया जाएगा।नीतीश कुमार ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने नवंबर 2005 में सत्ता संभालने के बाद से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में शिक्षकों की बड़ी संख्या में भर्ती की गई है और यह प्रक्रिया अब और मजबूत की जा रही है ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पहले लागू हुई थी डोमिसाइल नीति?
गौरतलब है कि डोमिसाइल नीति कोई नई पहल नहीं है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान नीतीश कुमार ने इसका वादा किया था और सरकार बनने के बाद इसे लागू भी किया गया था। हालांकि, यह नीति अधिक समय तक प्रभावी नहीं रह पाई। जुलाई 2023 में इसे यह कहते हुए रद्द कर दिया गया था कि गणित और विज्ञान जैसे विषयों के लिए पर्याप्त योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहे हैं। इस फैसले के बाद कई विपक्षी दलों और जननेताओं ने इस नीति को फिर से लागू करने की मांग उठाई थी।नीति के हटने के बाद राज्यभर में छात्रों ने इसका जोरदार विरोध किया था। सड़कों पर उतरकर युवाओं ने नारे लगाए थे।इस नीति को हटाए जाने का एक और बड़ा प्रभाव यह था कि इससे राज्य से हो रहे पलायन को और बल मिला, जिसे रोकने के लिए यह नीति मूल रूप से लाई गई थी।नीतीश कुमार का यह कदम राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने युवाओं को साधने की दिशा में यह रणनीतिक निर्णय लिया है। डोमिसाइल नीति की पुनः वापसी न केवल बिहार के युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर दिलाने की कोशिश है, बल्कि यह संदेश भी है कि सरकार उनकी आकांक्षाओं के साथ खड़ी है।TRE-4 और TRE-5 की परीक्षाओं में डोमिसाइल नीति लागू होने के बाद स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा कि यह निर्णय बिहार के युवाओं के रोजगार पर क्या असर डालता है। हालांकि इस नीति को लागू करने के साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी विषयों के लिए योग्य शिक्षक उपलब्ध हों और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता न हो।
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