देश की राजधानी दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी दिल्ली को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। बता दे कि राजधानी दिल्ली में अब एक अत्याधुनिक और सभी विभागों को एक छत के नीचे लाने वाला नया सचिवालय बनने जा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में इस संबंध में एक अहम एलान किया है। सरकार का मकसद एक ऐसा कार्यस्थल विकसित करना है, जहां प्रशासनिक कार्य सुगमता से हो और तमाम विभागों का समन्वय बेहतर हो। दिल्ली कौन का नया सचिवालय मिलने जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार एक ऐसे सचिवालय का निर्माण करें जहां लोग अच्छे से जनता के लिए काम कर सके।
पुराने सचिवालय की जगह और चुनौतियां
आपको बता दे कि इस समय दिल्ली सचिवालय इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के पास स्थित है, जिसे कभी प्लेयर बिल्डिंग के नाम से जाना जाता था। यह भवन यमुना के रिवर बेड क्षेत्र में स्थित है, जिसको लेकर इसकी भूकंपरोधी क्षमताओं पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। साथ ही, इस इमारत को लेकर फायर सेफ्टी NOC न मिल पाने की वजह से भी विवाद बना रहा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके सेफ्टी को देखते हुए सचिवालय शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने बताया की नई सचिवालय के जरिए कर्मचारी जनता के लिए बेहतर तरीके से कम कर सकेंगे।
होटल से सचिवालय बनने तक का सफर
1982 में एशियाई खेलों के दौरान प्लेयर बिल्डिंग का निर्माण एक होटल के तौर पर किया गया था, लेकिन समय पर निर्माण कार्य पूरा न होने के चलते इसका इस्तेमाल तय योजना के तहत नहीं हो सका। बाद में जब दिल्ली सरकार ने सिविल लाइंस स्थित अपने पुराने सचिवालय से शिफ्ट करने का फैसला लिया, तो यही बिल्डिंग दिल्ली सचिवालय बन गई। हालांकि यह शिफ्टिंग भी अधूरी रही क्योंकि सचिवालय में जगह की कमी के चलते केवल मुख्यमंत्री, मंत्री और करीब 19 विभागों के कार्यालय ही शिफ्ट किए जा सके। जल बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी जैसे अहम विभाग आज भी अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत हैं, जिससे प्रशासनिक समन्वय और कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।दिल्ली सरकार ने इससे पहले भी साल 2022 में ITO क्षेत्र में दो नई सचिवालय टावर बनाने की योजना बनाई थी। लगभग 1900 करोड़ रुपये का बजट भी इसके लिए स्वीकृत हुआ था। लेकिन निर्माण की धीमी रफ्तार और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने इस योजना को दोबारा से ज़मीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों को उपयुक्त स्थान की तलाश में लगाया गया है, ताकि एक ऐसी जगह का चयन हो सके जहां सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक सचिवालय भवन तैयार किया जा सके। इस बार सरकार की मंशा है कि कोई भी विभाग सचिवालय के बाहर न रह जाए और राजधानी को एक संगठित प्रशासनिक केंद्र मिले।इस निर्णय को न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टिकोण से बल्कि आम जनता के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे विभागीय कार्यवाही में तेजी आएगी और दिल्लीवासियों को एक ही जगह पर विभिन्न सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
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