जाति जनगणना की तारीख फिक्स, दो चरणों में होगी प्रक्रिया, यहां जानें पूरा डिटेल्स

Caste Census

New Delhi: जाति जनगणना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, जाति जनगणना की शुरुआत 1 मार्च 2027 से हो सकती है। हालांकि, इसकी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में चार पहाड़ी राज्यों — जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश — में 1 अक्टूबर 2026 से जाति जनगणना की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद, दूसरे चरण में अन्य सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1 मार्च 2027 से जनगणना कराई जाएगी।

पहले भी दो चरणों में होनी थी जनगणना, लेकिन कोविड ने डाला था असर

जनगणना 2021 के लिए भी इसी तरह दो चरणों में प्रक्रिया तय की गई थी। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच और दूसरा फरवरी 2021 में आयोजित किया जाना था। यहां तक कि पहले चरण की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, और 1 अप्रैल 2020 से क्षेत्रीय कार्य शुरू होने वाले थे। लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते इस योजना को स्थगित करना पड़ा।

सरकार ने हाल ही में फिर से जताया जाति जनगणना का संकल्प

हाल ही में सरकार ने फिर से स्पष्ट किया है कि वह जाति जनगणना कराएगी। 1931 तक जातिगत आंकड़े नियमित रूप से एकत्र किए जाते थे, लेकिन 1951 में इसे बंद कर दिया गया था। हालांकि, 2011 में SECC (सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना) के तहत कुछ आंकड़े जुटाए गए, लेकिन उस डाटा का पूरा उपयोग नहीं किया गया।

क्या है जाति जनगणना और क्यों है यह ज़रूरी?

जाति जनगणना एक सांख्यिकी प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न जातियों और सामाजिक समूहों की संख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य जानकारी इकट्ठा की जाती है। इससे सरकार को नीति निर्माण में मदद मिलती है। पिछड़े वर्गों की पहचान कर उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। यह सामाजिक न्याय, संसाधनों के उचित वितरण और असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है।

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Pooja Kumari Ms. Pooja,
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