देश की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. बुधवार को कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने हाल ही में विदेश भेजे गए संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मुलाकात की है, अब संसद के आगामी मानसून सत्र में पहलगाम हमले के बाद देश की सुरक्षा और विदेश नीति की चुनौतियों पर पूरी बहस के लिए तैयार होंगे? विपक्षी दल ने यह भी जानना चाहा कि क्या प्रधानमंत्री चीन और पाकिस्तान के संबंध में भारत की भविष्य की रणनीति पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे और उन्हें विश्वास में लेंगे.
पीएम मोदी की प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कांग्रेस के प्रश्न
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात की थी, जिसमें कई सांसद और पूर्व राजनयिक शामिल थे. इस प्रतिनिधिमंडल ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद के खतरे को खत्म करने के भारत के संदेश को विभिन्न देशों तक पहुंचाने के लिए पिछले कुछ हफ्तों में कई देशों की यात्रा की थी. इसी मुलाकात के बाद कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने तीखे सवाल दागे. रमेश ने कहा, “अब जबकि प्रधानमंत्री ने खुद 32 देशों में भेजे गए सात संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मुलाकात की है, तो क्या अब वह कम से कम सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक या बैठकों की एक श्रृंखला की अध्यक्षता करेंगे?” उन्होंने आगे पूछा, “क्या वह चीन और पाकिस्तान के संबंध में भारत की भावी रणनीति और सिंगापुर में सीडीएस के खुलासे के रणनीतिक निहितार्थों पर उन्हें विश्वास में लेंगे?”
मानसून सत्र में सुरक्षा और विदेश नीति चुनौतियों पर बहस की मांग
कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री आगामी मानसून सत्र में पहलगाम के बाद देश की सुरक्षा और विदेश नीति चुनौतियों पर पूरी बहस के लिए सहमत हों. रमेश ने याद दिलाया कि इंडिया ब्लॉक दलों द्वारा विशेष सत्र के लिए किए गए अनुरोध को दुर्भाग्य से अस्वीकार कर दिया गया था. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री पहलगाम के आतंकवादियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करेंगे. कांग्रेस का आरोप है कि ये वही आतंकवादी थे जो पुंछ (दिसंबर 2023) और गगनगीर व गुलमर्ग (2024) में हुए तीन अन्य आतंकी हमलों में भी शामिल थे.
कारगिल समीक्षा समिति जैसी रिपोर्ट की भी मांग
जयराम रमेश ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है. उन्होंने पूछा कि क्या विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पिता के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली कारगिल समीक्षा समिति जैसी विशेषज्ञों का एक समूह स्थापित किया जाएगा. इस समूह का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर का विस्तार से विश्लेषण करना, उभरते सैन्य प्लेटफार्मों और प्रौद्योगिकियों सहित युद्ध के भविष्य पर अपनी सिफारिशें देना, और संकट में रणनीतिक संचार के लिए राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करना होगा. रमेश ने अंत में पूछा, “क्या रिपोर्ट – उपयुक्त संशोधनों के बाद – संसद में रखी जाएगी, जैसे कि कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट फरवरी 2000 में रखी गई थी?” कांग्रेस का यह रुख राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार से अधिक पारदर्शिता और व्यापक चर्चा की मांग को दर्शाता है.
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