बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन ने 202 पर बढ़त हासिल कर ली है और महागठबंधन को 35 सीटों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। वैसे तो अभी प्रत्याशियों के हार और जीत की घोषणा होनी बाकी है, लेकिन ये तय है कि अंतिम नतीजे लगभग इसी के आस-पास रहने वाले हैं।
दोनों चरणों मे कराया गया मतदान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल बताते हैं कि मंगलवार को 122 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 68.79 प्रतिशत रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है। उन्होंने जानकारी दी कि पहले चरण का मतदान छह नवंबर को हुआ था और उसमें 65.08 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। दो चरणों में हुए चुनाव में 66.90 प्रतिशत का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया।। यह आंकड़ा पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 9.6 फीसदी ज्यादा है।
NDA ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बहुमत का आंकड़ा पार कर ऐतिहासिक और निर्णायक जीत हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली ‘डबल-इंजन सरकार’ की कहानी मतदाताओं के बीच खूब गूंजी, जिसके सामने महागठबंधन पूरी तरह से बिखर गया। इस बंपर जीत के पीछे केवल स्टार प्रचारक नहीं, बल्कि अचूक राजनीतिक इंजीनियरिंग और जमीनी कल्याणकारी योजनाएं थीं। इन योजनाओं के चलते तेजस्वी का सीएम बनने का सपना भी टूट गया। यह पांच कारण रहे जिन्होंने एनडीए की सफलता की इबारत लिखी।
प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं खोल सकी खाता
जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपना राजनीतिक विश्लेषक का करियर छोड़कर बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया था। उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही बिहार के लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों, तहसीलों, ब्लॉकों और गांवों का दौरा किया था।
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