सीबीआई और ED देश के वह दो संस्था है जो गलत चीज ,करप्शन ,ब्लैक मनी जैसे मुद्दों पर कड़ी कार्रवाई करती है। चाहे किसी मुद्दे का इन्वेस्टिगेशन करना हो या किसी के द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा हो सभी पर यह दोनों कड़ी कारवाई करते हैं। अब इसी से जुड़ी हुई खबर सामने आई है। बता दे कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने केंद्रीय जांच एजेंसियों CBI और ED की कार्रवाईयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने याचिका दायर कर यह सवाल उठाया है कि जब राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों को दी गई सामान्य सहमति पहले ही वापस ले ली है, तो उन्हें राज्य में जांच का अधिकार किस आधार पर प्राप्त हुआ। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि बिना राज्य सरकार की अनुमति के ऐसी कार्रवाई राज्य के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई सोमवार को करेगा।
ईडी ने जुलाई में चैतन्य बघेल को किया था गिरफ्तार
बता दे की जुलाई 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। और यह गिरफ्तारी शराब घोटाले को लेकर किया गया था। इस कार्रवाई से पहले ईडी की टीम ने भिलाई स्थित चैतन्य के घर पर छापेमारी की थी, जिसमें भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती भी देखी गई थी। इस छापे की पुष्टि खुद भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर की थी। उन्होंने उस समय ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि विधानसभा सत्र के आखिरी दिन अडानी और तमनार से जुड़े मुद्दे को उठाने की तैयारी थी, लेकिन इसी दिन ईडी की कार्रवाई कर दी गई।इससे पहले अप्रैल 2025 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भूपेश बघेल के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए महादेव बेटिंग एप से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इस एफआईआर में उन्हें छठवें आरोपी के तौर पर नामजद किया गया था। जांच एजेंसी ने इस एप के प्रमोटर्स सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया था। सीबीआई ने इस मामले की जांच के तहत देश के कई हिस्सों में छापेमारी की थी, जिसमें भूपेश बघेल समेत अनेक राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के ठिकाने शामिल थे।
राज्य सरकार की सहमति के बिना कार्रवाई पर विवाद
छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले ही CBI और ED को राज्य में स्वतः कार्रवाई करने की सहमति को रद्द कर दिया था। ऐसे में यह बड़ा सवाल बन गया है कि क्या इन एजेंसियों को अब राज्य में कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार रह जाता है। भूपेश बघेल और उनके बेटे की ओर से दायर याचिका इसी बिंदु पर आधारित है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है, जहां से इस पर एक बड़ा संवैधानिक फैसला आ सकता है।ईडी और सीबीआई की इन कार्रवाइयों को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि क्या केंद्रीय एजेंसियों की वर्तमान कार्रवाईयां वैध हैं या नहीं।यह मामला अब केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों की परिभाषा का भी बड़ा सवाल बन चुका है।
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