वॉशिंगटन। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच युद्ध की लागत तेजी से बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका इस संघर्ष पर हर दिन लगभग 900 मिलियन डॉलर के आसपास खर्च कर रहा है। यह खर्च मुख्य रूप से सैन्य अभियान, हथियारों के इस्तेमाल, नौसेना और वायुसेना की तैनाती तथा सुरक्षा संचालन पर हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है तो कुल खर्च कई अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। पहले कुछ दिनों में ही अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं, क्योंकि उन्नत मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन रोधी तकनीक और लड़ाकू विमानों के संचालन की लागत बहुत अधिक होती है।
इस बढ़ते खर्च के बावजूद अमेरिकी नेतृत्व ने फिलहाल आर्थिक बोझ को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि अगर इस कार्रवाई से सुरक्षा और रणनीतिक हित सुरक्षित होते हैं, तो यह कीमत स्वीकार की जा सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध का असर केवल सैन्य बजट तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका भी जताई जा रही है।
अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कुछ नेताओं का मानना है कि यदि अभियान लंबे समय तक चलता है तो सरकार को अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ सकती है, जिसके लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी।
फिलहाल, स्थिति पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि संघर्ष के बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है।
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