जब प्रेम रस में सराबोर हो बह जाओ तुम
जब बिन कारण खिलकर मुसकाओ तुम
जब महकते फूलों की सेज सजाओ तुम
जब हर बात निराली होती है उस वक़्त दिवाली होती है,उस वक़्त दिवाली होती है
जब सफलता के शिखर को चूमो तुम
जब बच्चों की किलकारी में झूमो तुम
जब भूल तमस परिवार समक्ष घूमों तुम
जब हर रात मतवाली होती है उस वक़्त दिवाली होती है उस वक़्त दिवाली होती है
जब मन मंदिर में ईश्वर से बाँध लिए खूटें
जब शाख़ों पे बदमस्त कोयल यूहीं कूकें
जब खलियानों में फसल के अंकुर फूटें
जब हर ओर हरियाली होती है उस वक़्त दिवाली होती है उस वक़्त दिवाली होती है
जब हिरणों सी सुंदर व चंचल हो काया
जब सनातन ऋषियों का उत्कृष्ट हो साया
जब भ्रमजाल हटाती कल्पवृक्ष कीहो छाया
जब हर शाम रूपाली होती है उस वक्त दीवाली होती है उस वक्त दीवाली होती है
इस दिवाली पर सदभावना की लौ जलायें प्रियजन व मित्रों के अत्यंत समीप जाएँ
वात्सल्य का निष्काम भाव सब में जगायें
जब हर घर खुशहाली होती है उस वक़्त दिवाली होती है उस वक़्त दिवाली होती है
ये दीवाली अपनों के साथ ख़ुशी से मनाएँ
हर्षोल्लास से घर में घी के दीपक जलायें
अपने तो अपने होतें हैं उन्हें दिल में बसायें
जब अमृत की प्याली होती है उस वक्त दीवाली होती है उस वक्त दीवाली होती है
सुनील कपूर की कलम से
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Sunil Kapoor |
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