Kerala High Court ने ‘The Kerala Story 2’ को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि फिल्म के निर्माताओं ने अदालत के लिए विशेष स्क्रीनिंग कराने में रुचि नहीं दिखाई। अदालत ने यह अवलोकन उस समय किया जब याचिकाकर्ताओं ने फिल्म की रिलीज़ से पहले न्यायिक स्क्रीनिंग की मांग उठाई थी।
क्या है मामला?
याचिका में दावा किया गया था कि फिल्म की विषयवस्तु संवेदनशील है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया था कि:
फिल्म को रिलीज़ से पहले देखा जाए,
संभावित विवादित अंशों की समीक्षा की जाए,
और आवश्यक होने पर रोक या निर्देश जारी किए जाएं।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि निर्माताओं की ओर से अदालत को फिल्म दिखाने की कोई पहल नहीं की गई। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि फिल्मों के प्रमाणन का अधिकार केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास है, और अदालत आमतौर पर तभी हस्तक्षेप करती है जब स्पष्ट रूप से कानून-व्यवस्था या संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न सामने आए।
कानूनी पहलू
फिल्मों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अदालतें अक्सर यह देखती हैं कि:
क्या फिल्म को वैधानिक प्रमाणन प्राप्त है,
क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बना हुआ है,
और क्या रोक लगाने के लिए पर्याप्त ठोस आधार मौजूद हैं।
आगे क्या?
मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि:
याचिका पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है या नहीं,
या फिर प्रमाणन प्रक्रिया को पर्याप्त मानते हुए हस्तक्षेप से परहेज किया जाए।
‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर विवाद के बीच केरल हाई कोर्ट की यह टिप्पणी बताती है कि अदालत फिलहाल निर्माताओं की ओर से विशेष स्क्रीनिंग के प्रति अनिच्छा को नोट कर रही है। अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून और संवैधानिक प्रावधानों के तहत हस्तक्षेप आवश्यक है या नहीं।
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