आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा चक्रवात ‘अर्नब’, 5.7 लाख लोगों पर खतरा; ओडिशा में स्कूल-कॉलेज बंद करने की तैयारी

Andhra Pradesh

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा की चिंता बढ़ा दी है। मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों की सुरक्षा है, जिनके घर समुद्र के करीब या निचले इलाकों में हैं।

रॉयटर्स की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, तूफान के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इस दौरान हवा की रफ्तार बढ़कर 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही कई इलाकों में भारी से बेहद भारी बारिश होने का खतरा है।

5.7 लाख लोगों की सुरक्षा पर नजर
आंध्र प्रदेश प्रशासन ने करीब 5.7 लाख ऐसे लोगों की पहचान की है, जो इस तूफान से प्रभावित हो सकते हैं। सोमवार शाम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई है। समुद्र में मौजूद मछुआरों को वापस लौटने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खराब मौसम के दौरान किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

वहीं, ओडिशा में भी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के पांच जिलों में मंगलवार और बुधवार को स्कूल-कॉलेज बंद रखने की घोषणा की गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को चक्रवात आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।

प्रशासन क्यों बरत रहा है इतनी सावधानी?
चक्रवात के दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से प्रशासन बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए भी तैयारी कर रहा है। हालांकि, तूफान का वास्तविक असर उसकी दिशा और तीव्रता पर निर्भर करेगा।

फिलहाल तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे प्रशासन की सलाह का पालन करें, मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट देखते रहें और बिना जरूरत समुद्र या जलभराव वाले क्षेत्रों की ओर न जाएं।

निष्कर्ष: चक्रवात अर्नब को लेकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तैयारियां तेज हैं। आने वाले दो दिन बेहद अहम हो सकते हैं। प्रशासन की कोशिश है कि समय रहते लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाकर जान-माल के नुकसान को कम किया जाए।

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