New Delhi: आजकल अनियमित दिनचर्या, खानपान की गलत आदतों, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ते वजन के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से सामने आ रही है। इस स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, जिससे लंबे समय में लिवर की सेहत प्रभावित हो सकती है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। कुछ हेल्दी ड्रिंक्स भी सही डाइट का हिस्सा बनकर लिवर की सेहत को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार, आंवले का जूस, ग्रीन टी, नींबू पानी, ब्लैक कॉफी और छाछ जैसे विकल्पों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इनमें से कोई भी ड्रिंक फैटी लिवर का अपने आप इलाज नहीं है।
आंवले का जूस: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर विकल्प
आंवला विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं। आंवले का जूस संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर शरीर को जरूरी पोषक तत्व दिए जा सकते हैं। इसके अलावा, आंवला त्वचा और बालों की सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है। हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि आंवले का जूस अकेले लिवर को डिटॉक्स करके उसमें जमा फैट खत्म कर देता है। इसके बेहतर लाभ के लिए बिना अतिरिक्त चीनी वाला जूस सीमित मात्रा में लेना और संपूर्ण आहार पर ध्यान देना जरूरी है।
ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी भी हो सकती हैं उपयोगी
ग्रीन टी में कैटेचिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जिनमें एपिगैलोकैटेचिन गैलेट (EGCG) प्रमुख है। ये तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़ी प्रक्रियाओं पर प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं, बिना चीनी वाली ब्लैक कॉफी में कैफीन और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे यौगिक पाए जाते हैं। कुछ अध्ययनों में कॉफी के सेवन को लिवर की पुरानी बीमारियों और फाइब्रोसिस के कम जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि, ग्रीन टी या कॉफी को फैटी लिवर का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। कॉफी का सेवन अपनी सहनशीलता के अनुसार करना चाहिए, क्योंकि अधिक कैफीन से बेचैनी, नींद में परेशानी और धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ग्रीन टी के अत्यधिक सेवन और खासकर इसके केंद्रित सप्लीमेंट्स से भी बचना चाहिए।
नींबू पानी और छाछ से मिलेगा हाइड्रेशन व पाचन में मदद
सुबह गुनगुना नींबू पानी पीना शरीर में पानी की कमी दूर करने और विटामिन सी प्राप्त करने का एक आसान तरीका है। यह मीठे पेय पदार्थों की जगह लेने पर कैलोरी का सेवन कम करने में भी मदद कर सकता है। हालांकि, नींबू पानी के खाली पेट सेवन से लिवर में जमा फैट सीधे कम होने या शरीर से विषैले पदार्थों को विशेष रूप से बाहर निकालने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। दूसरी ओर, छाछ में मौजूद पोषक तत्व और कुछ प्रकार की छाछ में पाए जाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया पाचन तंत्र की सेहत को सहारा दे सकते हैं। छाछ में भुना जीरा मिलाकर पीने से स्वाद बढ़ता है और कुछ लोगों को पाचन में भी आराम मिल सकता है। फैटी लिवर की समस्या में कम नमक वाली, बिना अतिरिक्त चीनी की छाछ बेहतर विकल्प हो सकती है।
फैटी लिवर से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
फैटी लिवर को नियंत्रित करने के लिए केवल हेल्दी ड्रिंक्स पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार लेना, मीठे पेय पदार्थों और अतिरिक्त चीनी का सेवन कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और जरूरत के अनुसार वजन नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। शराब से परहेज करना भी लिवर की सेहत के लिए जरूरी है। यदि फैटी लिवर का पता चल चुका है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और उपचार कराना चाहिए। किसी भी जूस या घरेलू नुस्खे को दवा का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। खासकर लिवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को हर्बल सप्लीमेंट्स या केंद्रित अर्क लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। सही खानपान, नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा देखभाल के जरिए लिवर को स्वस्थ रखने की दिशा में बेहतर कदम उठाए जा सकते हैं।
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Ms. Pooja, |
