देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राजधानी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदर्शन का आह्वान करने वाले Cockroach Janata Party (CJP) और अन्य संगठनों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जताने की घोषणा की है।
क्या है पूरा मामला?
प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग से जुड़े पक्षों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन का उद्देश्य डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग बढ़ाई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी में 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की योजना बनाई गई है। जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी संगठनों ने अपना विरोध जारी रखने की बात कही है। ऐसे में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।
मेट्रो और मोबाइल इंटरनेट पर भी असर
सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों के प्रवेश और निकास पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं। शुरुआती योजना में 57 स्टेशनों पर प्रतिबंध की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद संख्या घटाकर 45 किए जाने की खबर आई। इन प्रतिबंधों की अवधि और प्रभावित स्टेशनों की स्थिति के लिए यात्रियों को DMRC की ताजा आधिकारिक सूचना देखनी चाहिए।
इसके अलावा, नई दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक निलंबित करने का आदेश भी सामने आया है। यह प्रतिबंध पूरे दिल्ली में नहीं, बल्कि निर्धारित क्षेत्र में लागू किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए प्रतिबंधों पर सवाल
प्रदर्शन से पहले लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला उठा। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और आम नागरिकों की आवाजाही तथा आवश्यक सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
यह मामला अब केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकार, शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे अहम सवाल भी जुड़े हैं।
फिलहाल राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है।
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