लवलीना बोरगोहेन ने रचा इतिहास, 12 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को महिला बॉक्सिंग का गोल्ड

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लवलीना बोरगोहेन ने एशियन गेम्स में महिला बॉक्सिंग के 75 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने चीन की जियी बाओ को सर्वसम्मत निर्णय से हराया। इस जीत के साथ लवलीना 2014 के बाद एशियन गेम्स में महिला बॉक्सिंग का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बन गईं। 2014 में यह उपलब्धि दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम ने हासिल की थी। खास बात यह रही कि लवलीना ने अपने 29वें जन्मदिन पर यह शानदार जीत दर्ज की और खुद को गोल्ड मेडल के रूप में यादगार तोहफा दिया।

लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंचकर बनाया था रिकॉर्ड

लवलीना पहले ही लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनकर इतिहास रच चुकी थीं। इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। इस बार उनका लक्ष्य पदक का रंग बदलना था। फाइनल में उनके सामने चीन की जियी बाओ थीं, जो मुकाबले से पहले शौकिया बॉक्सिंग में अपराजित रिकॉर्ड और लगातार 14 जीत के सिलसिले के साथ रिंग में उतरी थीं। इसके बावजूद लवलीना ने शुरुआत से ही मुकाबले में आक्रामक और नियंत्रित रवैया बनाए रखा।

तीनों राउंड में दिखा लवलीना का नियंत्रण

पहले राउंड में लवलीना ने अपनी लंबाई और रीच का फायदा उठाते हुए बाओ के चेहरे पर कुछ अच्छे पंच लगाए और फिर क्लिंच का सहारा लिया। बाओ ने बॉडी पंच के जरिए वापसी की कोशिश की, लेकिन पांच में से तीन जजों ने लवलीना के पक्ष में फैसला दिया और पहला राउंड उन्होंने 3-2 से जीता। दूसरे राउंड में चीनी मुक्केबाज ने आक्रामक शुरुआत की और लवलीना को रक्षात्मक होने पर मजबूर किया। हालांकि, लवलीना ने जैब और हुक के जरिए जवाब दिया और राउंड के अंतिम हिस्से में लगाए गए उनके पंचों ने जजों को प्रभावित किया। यह राउंड भी 4-1 से लवलीना के पक्ष में गया।

आखिरी राउंड में डिफेंस से तय किया मुकाबला

तीसरे राउंड में लवलीना ने अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए डिफेंस पर ज्यादा ध्यान दिया। बाओ लगातार मजबूत पंच लगाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन लवलीना ने दूरी और अपनी रक्षात्मक रणनीति को बनाए रखा। जैसे-जैसे मुकाबला खत्म होने की ओर बढ़ा, नतीजा लवलीना के पक्ष में जाता दिखाई देने लगा। अंतिम फैसला सुनाए जाने के साथ ही भारतीय दल में खुशी की लहर दौड़ गई और लवलीना ने अपने कॉर्नर के साथ जीत का जश्न मनाया।

कॉमनवेल्थ गेम्स की हार से सीख लेकर हासिल किया गोल्ड

एशियन गेम्स से पहले लवलीना के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का अनुभव चुनौतीपूर्ण रहा था, जहां उन्हें ऑस्ट्रेलिया की एमा-स्यू ग्रीनट्री के हाथों हारकर सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। उस हार के बाद उन्होंने अपनी गलतियों पर काम करने और ट्रेनिंग में जरूरी सुधार करने का फैसला किया था। एशियन गेम्स से पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने ग्लासगो के प्रदर्शन से सकारात्मक बातें सीखीं और यह समझने की कोशिश की कि कहां बेहतर किया जा सकता था। रिंग में उनकी तैयारी और निरंतरता दिखाई दी और चीन की जियी बाओ को हराकर उन्होंने न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता, बल्कि 12 साल बाद एशियन गेम्स में महिला बॉक्सिंग के स्वर्ण पदक का इंतजार भी खत्म कर दिया।

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Pooja Kumari Ms. Pooja,
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