त्योहारों के मौसम के नजदीक आते ही देश में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर से सर्वोच्च अदालत का अहम फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक स्पष्ट बयान में यह साफ कर दिया है कि देश में पटाखों पर किसी भी प्रकार का संपूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि उल्लास के नाम पर पूरे चौबीस घंटे और बिना किसी नियम के आतिशबाजी करने की छूट भी नहीं दी जा सकती। कोर्ट का मानना है कि लोगों की धार्मिक आस्था और आम नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य, दोनों के बीच एक उचित तालमेल बनाकर चलना बेहद जरूरी है।
अदालत का संतुलित रुख: भावनाओं का सम्मान और सेहत की सुरक्षा
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ दोनों पक्षों पर अपनी बात रखी। अदालत ने स्वीकार किया कि त्योहारों से लोगों की गहरी भावनाएं जुड़ी होती हैं, इसलिए उन पर पूरी रोक लगाना उचित नहीं होगा। हालांकि, इसके साथ ही यह भी चिंता जताई गई कि यदि बेरोकटोक आतिशबाजी की जाए, तो इसका सबसे बुरा असर बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों, छोटे बच्चों और पर्यावरण पर पड़ता है। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग बिना किसी के जीवन और सेहत को खतरे में डाले अपने पर्व हर्षोल्लास के साथ मना सकें।
नियमों के दायरे में और तय समय पर ही हो सकेगा पटाखों का इस्तेमाल
इस फैसले के बाद अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि त्योहारी दिनों के दौरान प्रशासन द्वारा जो समय सीमा तय की जाएगी, उसी के भीतर सीमित मात्रा में आतिशबाजी की जा सकेगी। पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए वैज्ञानिक मानकों पर तैयार होने वाले पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के सीमित इस्तेमाल पर भी विचार किया गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमों का सख्ती से पालन कराएं, ताकि त्योहार की खुशियां भी बनी रहें और प्रदूषण का स्तर भी नियंत्रण में रहे।
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