New Delhi: नागोया के ओकाजाकी सेंट्रल पार्क में बुधवार को भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मिक्स्ड टीम और महिला टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। मिक्स्ड कंपाउंड टीम फाइनल में साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थी की जोड़ी ने दक्षिण कोरिया के पार्क जूनह्यून और अनुभवी चोई योंगही को कड़े मुकाबले में शूट-ऑफ तक पहुंचाया। इससे पहले भारतीय जोड़ी ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराया था। फाइनल के निर्णायक शूट-ऑफ में भारत ने दोनों प्रयासों में परफेक्ट प्रदर्शन करते हुए 20 अंक हासिल किए, जबकि दक्षिण कोरिया 19 अंक ही बना सका। इस एक अंक के अंतर ने भारत को गोल्ड के साथ 2028 ओलंपिक में जगह भी दिला दी।
दबाव भरे माहौल में भारतीय जोड़ी ने दिखाया गजब का संयम
मिक्स्ड टीम फाइनल के दौरान मौसम भी चुनौती बना हुआ था, लेकिन मुकाबले के निर्णायक क्षणों में हवा के शांत होने के साथ माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। पार्क में मौजूद दर्शकों के बीच सन्नाटा छा गया और सिर्फ तीरों के लक्ष्य पर लगने की आवाज सुनाई दे रही थी। एशियन गेम्स में अपना डेब्यू कर रहे साहिल और चिकिता ने इस दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। दोनों ने शूट-ऑफ के दोनों प्रयासों में सटीक निशाना लगाते हुए 20 का परफेक्ट स्कोर बनाया और दक्षिण कोरिया को एक अंक से पीछे छोड़ दिया। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने साल की शुरुआत में कुछ समय बिना कोच के तैयारी की थी और चयन ट्रायल में 2023 एशियन गेम्स के चैंपियन अदिति स्वामी और ओजस देवताले जैसे बड़े नाम इस बार टीम में जगह नहीं बना सके।
महिला टीम ने भी किया कमाल, चीन को हराकर बचाया खिताब
इसके बाद ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपार्थी और पृथिका प्रदीप की भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय तिकड़ी ने सेमीफाइनल में मजबूत मानी जा रही दक्षिण कोरियाई टीम को हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहां उसका सामना चीन से हुआ। फाइनल में भारतीय टीम ने 238 अंक हासिल किए और विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह रिकॉर्ड एशियाई और एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी है, जिसे इससे पहले 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में दक्षिण कोरिया ने बनाया था। इस जीत के साथ भारत ने 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स का महिला कंपाउंड टीम गोल्ड भी बरकरार रखा।
डेब्यू कर रहीं चिकिता और पृथिका ने बढ़ाया भारत का भरोसा
महिला टीम की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि टीम की तीन सदस्यों में से चिकिता तनिपार्थी और पृथिका प्रदीप का यह पहला एशियन गेम्स था। टीम की अनुभवी खिलाड़ी और अगुआ ज्योति सुरेखा वेन्नम ने दोनों युवा तीरंदाजों को संभालते हुए टीम को शानदार तरीके से आगे बढ़ाया। अनुभवी खिलाड़ियों के टीम में जगह नहीं बना पाने के बाद इन दोनों युवा खिलाड़ियों पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव था, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से खुद को साबित किया। ज्योति ने एशियन गेम्स से पहले कहा था कि टीम ने कैंप और पिछले दो वर्ल्ड कप के दौरान एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाने पर काफी मेहनत की है और मुकाबले की आखिरी घड़ी तक एक-दूसरे का साथ देने पर जोर दिया है।
नए कोच के साथ भारत ने हासिल किया बड़ा लक्ष्य
भारत के कंपाउंड तीरंदाजों की इस सफलता में नए कोच डेव कजिन्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। पूर्व अमेरिकी वर्ल्ड नंबर-1 कंपाउंड तीरंदाज कजिन्स के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने मुश्किल दौर से निकलकर एशियन गेम्स में अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी। मिक्स्ड टीम का गोल्ड न सिर्फ भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि रहा, बल्कि इसके साथ 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन भी हासिल हुआ। वहीं महिला टीम ने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए अपना एशियन गेम्स खिताब बचाया। मंगलवार को शूटिंग के ट्रैप और एथलेटिक्स की 4×400 मीटर रिले में गोल्ड के बाद बुधवार को कंपाउंड तीरंदाजी के इन दो स्वर्ण पदकों ने एशियन गेम्स में भारत के स्वर्णिम अभियान को और मजबूत कर दिया।
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Ms. Pooja, |
