महाराष्ट्र में इस साल मानसून का असर अब धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी अक्टूबर के शुरुआती दिनों में शुरू हो सकती है। अनुमान है कि करीब 5 अक्टूबर से मानसून की विदाई शुरू होकर 10 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है।
इस बीच राज्य में बारिश की स्थिति सभी इलाकों में एक जैसी नहीं रही है। 1 जून से 22 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में राज्य में करीब 787.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा लगभग 953.2 मिलीमीटर रहता है। यानी राज्य में बारिश की कमी करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
कुछ जिलों में यह कमी और ज्यादा देखने को मिली है। अहिल्यानगर में बारिश सामान्य से 42 प्रतिशत कम रही, जबकि सांगली में 24 प्रतिशत और सोलापुर में करीब 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। नंदुरबार में भी सामान्य से 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
हालांकि पूरे महाराष्ट्र की तस्वीर एक जैसी नहीं है। कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश भी दर्ज की गई है। पुणे और सतारा जैसे क्षेत्रों में पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा अपेक्षाकृत बेहतर रहा है, लेकिन हाल के हफ्तों में बारिश की गतिविधियां कमजोर हुई हैं।
पुणे में बारिश की कमी का असर खास तौर पर दिखाई दे रहा है। पुणे के शिवाजीनगर क्षेत्र में लंबे समय से तेज बारिश का सिलसिला नहीं देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार वहां 52 दिनों से 24 घंटे में 10 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बारिश नहीं हुई है।
हालांकि मौसम विभाग ने 23 सितंबर को महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है। पुणे और उसके आसपास के घाट क्षेत्रों के अलावा नासिक, कोल्हापुर और सांगली में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मानसून की वापसी का असर खेती, जल संसाधनों और स्थानीय मौसम पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन राज्य के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर बनी हुई है और लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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