गर्मी का मौसम आते ही या दोस्तों के साथ पार्टी करते समय, गले को तर करने के लिए सबसे पहला ख्याल कोल्ड ड्रिंक का ही आता है। बाजार में मिलने वाले रंग-बिरंगे और बुलबुलों से भरे ये सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने में जितने ज्यादा स्वादिष्ट और ताज़गी भरे लगते हैं, अंदर से शरीर को उतना ही ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। अक्सर लोग इसे केवल एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक मानकर लगातार पीते रहते हैं, लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि इसमें मौजूद तत्व धीरे-धीरे शरीर के अंगों पर बुरा असर डाल रहे होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोल्ड ड्रिंक का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए किसी धीमे ज़हर से कम नहीं है।
शरीर में जाता है एक्स्ट्रा शुगर का पहाड़
कोल्ड ड्रिंक के नुकसानदायक होने की सबसे बड़ी वजह इसमें मौजूद अत्यधिक मात्रा में रिफाइंड शुगर यानी चीनी है। एक सामान्य 350 मि.ली. की कोल्ड ड्रिंक की बोतल में लगभग 8 से 10 चम्मच चीनी घुली होती है। जब आप इतनी ज्यादा मात्रा में चीनी अचानक पीते हैं, तो शरीर का ब्लड शुगर लेवल तेजी से स्पाइक कर जाता है। इस अतिरिक्त चीनी को संभालने के लिए पैंक्रियाज को बहुत ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जो लंबे समय में जाकर टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) का सबसे बड़ा कारण बनता है।
मोटापे और फैटी लीवर की मुख्य वजह
कोल्ड ड्रिंक में कोई भी पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन या मिनरल्स नहीं होते, बल्कि इसमें सिर्फ एम्प्टी कैलोरीज़ (शून्य पोषण वाली कैलोरी) होती हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाला ‘हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप’ शरीर में जाकर वसा यानी फैट के रूप में जमा होने लगता है। इसके कारण पेट और कमर के आसपास तेजी से चर्बी बढ़ती है। इसके अलावा, फ्रुक्टोज को पचाने का काम केवल लीवर का होता है, और जब लीवर पर फ्रुक्टोज का बहुत अधिक दबाव पड़ता है, तो नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।
दांतों और हड्डियों को बनाता है कमजोर
कोल्ड ड्रिंक में कार्बनिक एसिड, फॉस्फोरिक एसिड और सिट्रिक एसिड मौजूद होते हैं। यह एसिडिक प्रकृति दांतों की ऊपरी सुरक्षात्मक परत यानी ‘इनेमल’ को धीरे-धीरे घिसने लगती है, जिससे दांतों में सड़न, कैविटी और झनझनाहट की समस्या शुरू हो जाती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद फॉस्फोरिक एसिड शरीर में कैल्शियम के अवशोषण (अब्जॉर्प्शन) को रोक देता है। जब शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर होने लगती हैं, जिससे कम उम्र में ही जोड़ों के दर्द की शिकायत होने लगती है।
किडनी पर बढ़ता है अतिरिक्त दबाव
हमारा शरीर जो भी चीज़ें ग्रहण करता है, उसमें से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम किडनी करती है। कोल्ड ड्रिंक में आर्टिफिशियल स्वीटनर, प्रिजर्वेटिव्स और फॉस्फोरिक एसिड अत्यधिक मात्रा में होते हैं। जब आप रोजाना कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो किडनी को इन हानिकारक केमिकल्स को फिल्टर करने के लिए सामान्य से दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि अत्यधिक सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से किडनी में पथरी (स्टोन) होने और किडनी के क्रोनिक डैमेज होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
पाचन तंत्र और नींद पर बुरा असर
कोल्ड ड्रिंक को ज्यादा समय तक खराब होने से बचाने और उसमें बुलबुले बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस मिलाई जाती है। इसे पीने से पेट में गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और सीने में जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा, कई कोल्ड ड्रिंक्स में ‘कैफीन’ भी मिलाया जाता है, जो दिमाग को कुछ समय के लिए तरोताजा तो महसूस कराता है, लेकिन बाद में इसकी आदत लग जाती है। शाम या रात के समय कैफीन युक्त कोल्ड ड्रिंक पीने से अनिद्रा (नींद न आना) और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
स्वास्थ्य के लिहाज से कोल्ड ड्रिंक को अपनी रोज़मर्रा की लाइफस्टाइल से दूर रखना ही समझदारी है। अगर आपको कुछ ठंडा और ताज़ा पीने का मन करे, तो डिब्बाबंद और सोडा युक्त ड्रिंक्स की जगह नारियल पानी, ताज़ा नींबू पानी, छाछ या ताज़े फलों का जूस चुनना आपकी सेहत के लिए बहुत बेहतर विकल्प साबित होगा।
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