सिर्फ नींद का समय पूरा करना ही काफी नहीं; शरीर में सुस्ती और आलस की वजह हो सकती हैं आपकी ये अनजानी गलतियां
अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि वे रात को 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लेते हैं, फिर भी सुबह उठते ही शरीर भारी लगता है और दिनभर थकान व सुस्ती छाई रहती है। हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सिर्फ बिस्तर पर 8 घंटे बिता देना ही तरोताजा महसूस करने के लिए काफी है, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की गहराई उसके समय से कहीं ज्यादा मायने रखती है। अगर आपको भी पर्याप्त सोने के बाद भी ऊर्जा की कमी महसूस होती है, तो इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं।
नींद की गहराई की कमी और गलत आदतें इस थकान का सबसे बड़ा कारण हैं। जब हम सोने से ठीक पहले मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर की चमकती स्क्रीन देखते हैं, तो उससे निकलने वाली नीली रोशनी हमारे दिमाग में नींद लाने वाले रसायन को बनने से रोकती है। इससे हम सो तो जाते हैं, लेकिन हमारी नींद हल्की रहती है और दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पाता। इसके अलावा, सोने से ठीक पहले भारी खाना खाना या चाय-कॉफी का सेवन करना भी हमारी पाचन क्रिया को बिगाड़ता है, जिससे रात भर शरीर आराम करने के बजाय भोजन पचाने में लगा रहता है।
शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी और पानी की कमी भी दिनभर की सुस्ती का मुख्य कारण बनती है। शरीर में खून की कमी या कुछ मुख्य विटामिन्स की कमी से ऊर्जा का स्तर तेजी से घटने लगता है, जिससे हर समय कमजोरी महसूस होती है। इसके साथ ही, दिनभर में पर्याप्त पानी न पीने से शरीर की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाती है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव और भारीपन महसूस होता है।
इस समस्या से राहत पाने के लिए अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव करना बेहद जरूरी है। सोने से कम से कम 1 घंटे पहले सभी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद कर दें। रोज एक ही निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत डालें। अपनी खुराक में हरी सब्जियां, फल और मेवे शामिल करें तथा दिनभर में भरपूर पानी पिएं। इसके अलावा, सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बिताएं और हल्की वॉक करें, जिससे शरीर की जैविक घड़ी सही बनी रहे और आप पूरा दिन तरोताजा महसूस करें।
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