New Delhi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और गणेश चतुर्थी को देखते हुए प्रदेश में सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूरे प्रदेश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है, ऐसे में मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए पहले से विस्तृत क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाए। श्री बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन के साथ समन्वय कर अलग व्यवस्था बनाने और जरूरत के मुताबिक होल्डिंग एरिया तैयार करने को कहा गया है। वृंदावन में नया पुलिस सर्किल गठित कर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती तथा मथुरा और वृंदावन के लिए अलग-अलग जॉइंट मजिस्ट्रेट नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी थानों और पुलिस लाइनों में भी जन्माष्टमी श्रद्धा के साथ मनाने, आकर्षक झांकियां सजाने और आम लोगों को इसमें शामिल करने को कहा गया है।
गणेश विसर्जन और त्योहारों को लेकर सुरक्षा पर जोर
गणेश चतुर्थी के बाद होने वाले प्रतिमा विसर्जन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विशेष सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने हाईटेंशन तारों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिमाओं की ऊंचाई निर्धारित सीमा में रखने के निर्देश दिए हैं। कई नदियों में उफान की स्थिति को देखते हुए विसर्जन स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों की पहले से समीक्षा, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए, ताकि सभी पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हों। वहीं, राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘तारीख पर तारीख’ की व्यवस्था खत्म करनी होगी। पांच साल से अधिक समय से लंबित सभी राजस्व मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर निस्तारित करने और अविवादित वरासत के मामलों को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनशिकायतों के निस्तारण में सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं चलेगी
मुख्यमंत्री ने शनिवार देर शाम शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और फील्ड अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनहित से जुड़े मामलों की समीक्षा की। उन्होंने जनता दर्शन और आईजीआरएस से प्राप्त शिकायतों का त्वरित और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करने को कहा। योगी ने साफ किया कि शिकायत का निस्तारण केवल कागजों में नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या के समाधान के रूप में दिखाई देना चाहिए। अधिकारियों को किसी भी मामले को बंद करने से पहले संबंधित तथ्यों और अभिलेखों की जांच तथा जरूरी रिपोर्ट हासिल करने के निर्देश दिए गए। समीक्षा में ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें मूल शिकायत की जगह किसी दूसरी जानकारी के आधार पर प्रकरण निस्तारित कर दिया गया था या आवश्यक रिपोर्ट के बिना ही मामला बंद कर दिया गया। ऐसे मामलों और असंतुष्ट फीडबैक वाले प्रकरणों की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा गलत या असंतोषजनक निस्तारण वाले मामलों को संबंधित जिलाधिकारी या पुलिस कप्तान के पास भेजकर पांच दिन में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
राजस्व मामलों की जिलावार मॉनिटरिंग, अपराध के आंकड़ों पर भी नजर
बैठक में राजस्व परिषद ने नायब तहसीलदार से लेकर उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और राजस्व परिषद स्तर तक नामांतरण, सीमांकन, पैमाइश, अंश निर्धारण, वरासत, बंटवारा और भू-उपयोग से जुड़े मामलों की स्थिति प्रस्तुत की। पांच साल से अधिक समय से लंबित मामलों वाले शीर्ष पांच जिलों और प्रदेश के सबसे लंबे समय से लंबित शीर्ष 10 मामलों की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को अपने जिलों में कोर्टवार समीक्षा कर लंबित मामलों की नियमित निगरानी करने को कहा। दूसरी ओर, 13 जुलाई से 23 अगस्त के बीच अपराध की स्थिति की समीक्षा में बताया गया कि 13 से 19 जुलाई की तुलना में 17 से 23 अगस्त के दौरान कुल एफआईआर में 0.4 प्रतिशत, गंभीर अपराधों में 5.1 प्रतिशत, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 3.9 प्रतिशत और अनुसूचित जाति/जनजाति के खिलाफ अपराधों में 11.2 प्रतिशत कमी दर्ज हुई। मुख्यमंत्री ने महिला और बच्चों से जुड़े अपराधों में विशेष संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई, जोन और रेंज स्तर पर साप्ताहिक क्राइम एनालिसिस तथा महिला बीट पुलिस अधिकारियों की सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए। छेड़खानी और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर भी सख्त कार्रवाई करने को कहा गया।
माफियाओं पर कार्रवाई जारी रखने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत तेज करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने माफिया के खिलाफ अभियान जारी रखने के साथ गो-तस्करी, धर्मांतरण, लव जिहाद, धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ और महापुरुषों की प्रतिमाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को लेकर पुलिस-प्रशासन को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए। स्लाटर हाउस की नियमित औचक जांच और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा चित्रकूट, फर्रुखाबाद, अयोध्या, आजमगढ़ और बाराबंकी में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री की गुणवत्ता की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को लेने को कहा। राहत शिविरों में लोगों को पर्याप्त और गरम भोजन उपलब्ध कराने, जलभराव वाले क्षेत्रों के अस्पतालों में एंटी-वेनम और एंटी-रेबीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा बाढ़ के बाद संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए गए। पशुओं में लंपी डिजीज की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग को भी तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
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Ms. Pooja, |
