सामान्य वर्ग का हल्ला बोल: जंतर-मंतर पर आरक्षण नीति और UGC के नए नियमों के खिलाफ गूंजी आवाज

Jantar Mantar

राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े जनांदोलन का गवाह बना। देश के कोने-कोने से पहुंचे सामान्य वर्ग के युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और यूजीसी (UGC) की नई गाइडलाइंस के विरोध में हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि प्रतिभा और योग्यता को दरकिनार कर जाति के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण से देश का नुकसान हो रहा है। इसलिए अब समय आ गया है कि आरक्षण का पैमाना जाति नहीं, बल्कि केवल और केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को बनाया जाए, ताकि असली जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का फायदा पहुंच सके।

जातिगत आरक्षण की जगह आर्थिक स्थिति बने पैमाना

आंदोलन में शामिल युवाओं ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि एक ही संसाधन से पढ़ाई करने वाले दो युवाओं के भविष्य का फैसला उनके अंकों से नहीं, बल्कि उनकी जाति से तय हो रहा है। अधिक अंक लाने के बावजूद सामान्य वर्ग का युवा पिछड़ जाता है, जबकि कम अंकों वाले को आसानी से अवसर मिल जाता है। प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि नौकरियों, कॉलेजों में एडमिशन और सरकारी सुविधाओं में मदद का आधार केवल व्यक्ति की गरीबी और माली हालत होनी चाहिए। इसके अलावा ‘एक परिवार, एक आरक्षण’ की व्यवस्था लागू करने की बात भी प्रमुखता से उठाई गई।

UGC के नियमों पर तीखी नाराजगी और SC/ST एक्ट पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए तैयार किए जा रहे नए इक्विटी नियमों का जमकर विरोध हुआ। युवाओं का आरोप था कि ये नियम परिसरों में छात्रों के बीच समानता लाने के बजाय मतभेद और विभाजन को और गहरा करेंगे, इसलिए इन्हें तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। वहीं, मंच से अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के हो रहे गलत इस्तेमाल पर भी गहरी चिंता जताई गई। मांग की गई कि किसी भी बेगुनाह को फंसने से बचाने के लिए इस कानून की समीक्षा कर इसमें जरूरी सुधार किए जाएं।

प्रशासन सख्त, आंदोलन और तेज करने की चेतावनी

जंतर-मंतर पर भीड़ और तनाव को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। लुटियंस दिल्ली की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे दिनभर यातायात भी प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों का ज्ञापन सरकार तक पहुंचाया। आयोजकों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि सामान्य वर्ग की इस जायज आवाज को नजरअंदाज किया गया और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा नहीं हुई, तो यह विरोध आने वाले दिनों में देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगा।

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