मौका और दस्तूर दोनों को देखते हुए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से देश की युवा पीढ़ी और विशेषकर खिलाड़ियों को सम्बोधित करते हुए जो कुछ कहा, भारतीय खेलों के पिछड़ने की तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हो गई है l उन्होंने माना कि ओलिंपिक की लगभग दो तिहाई स्पर्धाओं में हमारी भागीदारी नहीं होती l ऐसे में पदक जीतने की सम्भावनाएं स्वतः ही कम हो जाती हैं l भले ही उन्होंने युवाओं को खेल भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया लेकिन प्रधानमंत्री यह बताना भूल गए कि भारत खेल जगत का सबसे बड़ा नशाखोर देश है l उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित किया लेकिन काश यह भी बोल देते कि उम्र की धोखाधड़ी में भी हम नंबर वन हैं l
जी हां डोप और एज फ़्रॉड देश के खेल सिस्टम को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं l क्योंकि पीएम ने ओलंपिक के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिभाखोज अभियान चलाने का आह्वान किया है इसलिए जरुरी हो जाता है कि खिलाड़ियों को नशीले पदार्थों के सेवन से बचाया जाए l साथ ही उम्र की धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और कड़ी सजा का प्रावधान भी जरुरी है l इन दोनों बीमारियों के पीछे देश के गणमान्य कोच , खेल प्रशासन, फेडरेशन और स्कूल- कॉलेज और अकादमियाँ बराबर जिम्मेदार हैं l एक सर्वे से पता चला है कि अधिकांश खिलाड़ी 15से 17 साल के बीच खेल मैदान में उतरते हैं l उस उम्र में जबकि यूरोप, अमेरिका, चीन आदि देशों के खिलाड़ी पदक जीत रहे होते हैं l तैराकी, जिम्नास्टिक और रैकेट खेलों में दर्जनों ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे l लेकिन भारतीय खिलाड़ी बड़ी उम्र में खेलना शुरू करते हैं और छोटे आयुवर्ग के आयोजनों में उम्र घटा कर और डोप की मदद से चौधराहट दिखाते हैं l
चूंकि भारत 2036 के ओलंपिक की मेजबानी का सपना देख रहा है इसलिए आज और अभी से तैयारी शुरू करने की जरुरत है l खिलाड़ियों को हर प्रकार की सुविधाएं देने का वादा किया गया है लेकिन जरुरत इस बात की भी है कि देश में खेलों का माहौल बिगाड़ने वालों को आड़े हाथों लिया जाए, जिनमे देश के खेल संघ, खेल प्राधिकरण और खेल मंत्रालय भी शामिल हैं l
सम्भवताया प्रधानमंत्री भी देश के युवाओं के तेवरों को समझ गए हैं l यही कारण है कि 15 अगस्त पर उनका भाषण युवा और खेलों के इर्द गिर्द रहा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
