ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद हरियाणा बनाम शेष भारत, हरियाणा बनाम गुजरात और हरियाणा एवम अन्य राज्यों के बीच एक ऐसा विवाद छिड़ गया है, जिसे ना निगलते बनता है और ना ही उगलते l इसलिए क्योंकि हरियाणा देश का ऐसा समृद्ध राज्य है, जहाँ दूध घी का खाना है l ज़ाहिर है जिस प्रदेश में दूध दही की नदियाँ बह रही हों उसके युवा दमदार होने चाहिए और हरियाणा ने ऐसा बार बार और लगातार करके दिखाया है l हाल ही में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने भारत द्वारा जीते गए 13 स्वर्ण पदकों में से आधे से ज्यादा सात पदक जीते l लेकिन सरकार के खेल बजट में से हरियाणा को मात्र 88 करोड़ मिले जबकि एक भी स्वर्ण नहीं जीतने के बावजूद गुजरात को 608 करोड़ दिए जानेमन पर देश में एक अलग तरह की बहस छिड़ गई है l जिसके सूत्र धार दीपेंद्र हुड़्डा हैं l
‘पदक जीते हरियाणा और मलाई खाए गुजरात, ऐसा क्यों?, “पसीना हम और हमारे युवा बाहएं, देश का मान सम्मान हम बढ़ाएं और खेलो इंडिया का बजट खाए गुजरात, ऐसा क्यों हो रहा है? ” हरियाणा के युवा, कोच और खिलाड़ी सीधे सीधे उनकी मेहनत, उनके पसीने और देशभक्ति पर डाका डालने की बात कर रहे हैं l इसमें दो राय नहीं कि पिछले कुछ सालों में देश का मान बढ़ाने और पदक तालिका में सम्मानजनक स्थान दिलाने में हरियाणा का योगदान बढ़ चढ़ कर रहा हैl कुश्ती से लेकर मुक्केबाजी, एथलेटिक,जूडो और तमाम दमखम वाले खेलों में हरियाणा भारतीय सफलताओं का पर्याय बन गया है l हरियाणवी मां -बाप, के त्याग, तपस्या और देश भक्ति को यदि खेल बजट से तौला जाए तो निसंदेह हरियाणा आधे से ज्यादा खेल बजट का हकदार बनता है l यह तर्क गलत हो सकता है लेकिन यह तो सही है कि उसे अधिकाधिक और गुजरात से ज्यादा मिलना चाहिए l
कॉमनवेल्थ खेलों के नतीजों के बाद एक और विवाद छिड़ गया है l वह यह कि एक भी पदक नहीं जीत पाने वाले गुजरात को अगले खेलों की दावेदारी काहे सौंम्पी गई है? दीपेंद्र हुड़्डा के साथ आवाज़ मिला कर पूरा प्रदेश यहाँ तक कहने लगा है कि – पदक जीते हरियाणा और कॉमनवेल्थ खेल आयोजन की मलाई खाए गुजरात! ऐसा क्यों? लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि खेलों का आयोजक राज्य पहले तय हो चुका है l तैयारियां चल रही हैं l साथ ही यह भी विदित है कि गुजरात का राजनैतिक कद बहुत ऊँचा है l वहां पहले ही खेल स्टेडियम, सुविधाएं और सबकुछ पहले से बहुतायत में है l फ़िरभी यह तो मानना ही पड़ेगा कि दीपेंद्र और उनके प्रदेश की माग ज़ायज है l उनके तर्क दमदार हैं l यही कारण है कि अब दलगत राजनीति और आरोप प्रत्यरोपों का खेल भी चल निकला है l हम तो बस यही कह सकते हैं, ‘हरियाणा ज़िंदाबाद, उसके खिलाड़ी ज़िंदाबाद और ज़िंदाबाद खिलाड़ियों के गुरु और मातापिता! ”
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
