तीन बेटियों को पढ़ाया-लिखाया, लेकिन अंतिम विदाई में नहीं पहुंच सका परिवार! वीडियो कॉल पर हुए पिता के अंतिम दर्शन

Shivcharan Ram Ratan Gupta

New Delhi: मुंबई के मूल निवासी और पूर्व कपड़ा कारोबारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की जिंदगी परिवार के लिए समर्पण और संघर्ष की मिसाल रही। उन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी तीनों बेटियों की परवरिश और शिक्षा-दीक्षा में लगा दिया। लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रहना पड़ा। लंबे समय से बीमारी से जूझने के बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही एक ऐसी घटना सामने आई जिसने लोगों को भावुक कर दिया और समाज में बुजुर्गों की स्थिति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

वृद्धाश्रम में बीते अंतिम दिन, बेटियों ने वीडियो कॉल पर दी विदाई

बताया गया कि शिवचरण गुप्ता करीब दो वर्षों से अपनी पत्नी मीना के साथ सोनीपत के वृद्धाश्रम में रह रहे थे। कुछ समय पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो चुका था, जिसके बाद वह वहीं रह रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनकी तीनों बेटियों को जानकारी दी, जो वर्तमान में नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई में रहती हैं। हालांकि किसी भी बेटी के मौके पर पहुंच पाना संभव नहीं हो सका। ऐसे में उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने पिता के अंतिम दर्शन किए, जबकि वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।

सोशल मीडिया पर भावुक हुईं प्रतिक्रियाएं, लेकिन उठे संतुलित सवाल भी

यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की भावुक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने इसे बदलते पारिवारिक रिश्तों, बुजुर्गों के बढ़ते अकेलेपन और आधुनिक जीवनशैली की कड़वी सच्चाई से जोड़कर देखा। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि केवल इस घटना के आधार पर बेटियों को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि उनके अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सार्वजनिक नहीं हैं। ऐसे में बिना पूरी जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं माना जा सकता।

बुजुर्गों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर फिर शुरू हुई बहस

शिवचरण गुप्ता की यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करती है। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच बुजुर्गों की देखभाल, पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक जुड़ाव को कैसे मजबूत बनाया जाए। साथ ही यह भी याद दिलाती है कि हर घटना के पीछे कई ऐसे कारण हो सकते हैं जो सामने नहीं आते। इसलिए संवेदनशीलता और तथ्यों के साथ किसी भी मामले को समझना और उस पर प्रतिक्रिया देना ही सबसे उचित दृष्टिकोण है।

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Pooja Kumari Ms. Pooja,
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