ग्लास्गो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) में शनिवार का दिन पूरी तरह से भारत के नाम रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने रिंग में उतरकर ऐसा कमाल दिखाया कि विरोधी खिलाड़ी उनके मुक्कों के आगे टिक ही नहीं पाए। बॉक्सिंग के मुकाबलों में भारत के मुक्केबाजों ने एक के बाद एक शानदार जीत दर्ज करते हुए एक ही दिन में देश की झोली में कुल 7 गोल्ड मेडल डाल दिए। इस जबरदस्त प्रदर्शन के दम पर भारत अब मेडल तालिका में चौथे नंबर पर पहुंच गया है।
रिंग में दिखा भारतीय पंच का दम
शनिवार को महिला और पुरुष दोनों ही वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने लायक था। महिला मुक्केबाजी में प्रीति पवार, साक्षी चौधरी, जैस्मिन लम्बोरिया, प्रिया घंघस और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने फाइनल मैच जीतकर सोने का तमगा अपने नाम किया। वहीं पुरुषों के वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने भी बेहतरीन पंच जमाते हुए देश के लिए गोल्ड मेडल जीते। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में किसी भी देश के लिए बॉक्सिंग में एक ही दिन में 7 गोल्ड जीतना अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड बन गया है।
विरोधी खिलाड़ियों को नहीं दिया संभलने का मौका
फाइनल मुकाबलों में हमारे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था। कोटा की रहने वाली अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की मुक्केबाज को एकतरफा 5-0 से हराकर मुकाबला अपने नाम किया। बाकी खिलाड़ियों ने भी अपनी फुर्ती और सही समय पर सटीक पंच मारकर विरोधियों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। हालांकि लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह और नरेंद्र बेरवाल को फाइनल में कड़ी टक्कर के बाद सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा, लेकिन फिर भी भारतीय बॉक्सिंग टीम ने कुल 10 मेडल (7 गोल्ड और 3 सिल्वर) जीतकर इतिहास रच दिया।
मेडल तालिका में भारत की लंबी छलांग
शनिवार को मिले इन 7 गोल्ड मेडल्स ने पदक तालिका में भारत की तस्वीर ही बदल दी। मुक्केबाजों के इस धमाकेदार खेल की बदौलत भारत अब 13 गोल्ड मेडल के साथ चौथे पायदान पर आ गया है। इस शानदार जीत के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल है और हर कोई हमारे खिलाड़ियों के इस बेहतरीन प्रदर्शन की तारीफ कर रहा है।
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