New Delhi: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो टीम ने ऐसा इतिहास रचा, जिसका देश को कई दशकों से इंतजार था। 1990 में कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो की शुरुआत के बाद पहली बार भारत ने इस खेल में स्वर्ण पदक जीते। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास बनाया, जबकि यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीतकर भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ जूडो अभियान को और यादगार बना दिया। इससे पहले भारत के खाते में केवल रजत और कांस्य पदक ही थे, लेकिन इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्णिम सफलता हासिल कर नया अध्याय लिख दिया।
अस्मिता डे की भावुक कहानी, संघर्ष के बाद मिला स्वर्णिम इनाम
महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली 23 वर्षीय अस्मिता डे की सफलता संघर्ष और हौसले की मिसाल है। कुछ महीने पहले ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया था, जो सीमित आय के बावजूद उनके खेल करियर के सबसे बड़े सहायक थे। पिता के निधन के बाद अस्मिता ने खेल छोड़ने तक का मन बना लिया था, लेकिन उनकी मां ने उन्हें दोबारा मैट पर लौटने के लिए प्रेरित किया। ग्लासगो में उन्होंने कनाडा की हेडी क्वाच के खिलाफ रोमांचक फाइनल में शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को गोल्डन स्कोर तक पहुंचाया और निर्णायक अंक हासिल कर 2-1 से जीत दर्ज की। यह जीत उन्होंने अपने दिवंगत पिता को समर्पित की।
हर्ष सिंह ने अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को हराकर दिलाया दूसरा गोल्ड, यामिनी ने जीता रजत
भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी ओलंपियन जोशुआ कैट्ज़ को शानदार रणनीति और संयम के साथ हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मुकाबले के अंतिम 41 सेकंड में उन्होंने वाजा-आरी के जरिए निर्णायक बढ़त बनाई और अंत तक उसे बरकरार रखा। वहीं महिला 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य ने इंग्लैंड की असेल्या टोपराक के खिलाफ जोरदार संघर्ष किया। निर्धारित समय तक मुकाबला बराबरी पर रहा और फैसला गोल्डन स्कोर में हुआ, जहां अतिरिक्त समय में मिली तीसरी शिडो (पेनल्टी) के कारण यामिनी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने रजत पदक जीतकर भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत के लिए ऐतिहासिक अभियान, अब आगे और पदकों की उम्मीद
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो भारत के लिए सबसे सफल खेलों में से एक बनकर उभरा है। दो स्वर्ण और एक रजत पदक के साथ भारतीय टीम ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। इस ऐतिहासिक सफलता ने साबित कर दिया है कि भारतीय जूडो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। वहीं, अब भारतीय खिलाड़ियों उन्नति शर्मा (महिला 63 किलोग्राम) और करणजीत सिंह मान (पुरुष 90 किलोग्राम) से भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे भारत की झोली में और सफलताएं जुड़ सकती हैं।
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