आत्मनिर्भरता की नई मिसाल: अब समंदर में ‘मालवान’ मचाएगा तहलका, जानें क्यों भारत बन रहा है वॉरशिप बनाने की सबसे बड़ी फैक्ट्री

मालवान

भारतीय नौसेना की ताकत में बहुत तेजी से इजाफा हो रहा है. देश की समुद्री सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए एक के बाद एक स्वदेशी वॉरशिप तैयार हो रहे हैं. इस दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय नौसेना आगामी बाइस जुलाई को अपने बेड़े में ‘मालवान’ (Malvan) नाम का एक बेहद आधुनिक और शक्तिशाली युद्धपोत शामिल करने जा रही है. यह एंटी सबमरीन वॉरशिप है जो पानी के भीतर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को पलक झपकते ही खोजकर उन्हें तबाह करने में माहिर है. इसके शामिल होने से हिंद महासागर और तटीय इलाकों में भारत की पकड़ बहुत ज्यादा मजबूत हो जाएगी.

क्या है ‘मालवान’ और क्यों है यह इतना खास

‘मालवान’ को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है. यह माहे-क्लास के एंटी सबमरीन वॉरशिप की श्रृंखला का दूसरा जहाज है. इस अस्सी मीटर लंबे और ग्यारह सौ टन वजनी जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसकी पानी के नीचे काम करने की तकनीक है. इसे विशेष रूप से कम गहरे और तटीय पानी में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है जहां विशालकाय जहाज या पनडुब्बियां आसानी से नहीं पहुंच पाती हैं.

इसमें वाटरजेट प्रोपल्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो इसे बेहद संकरे पानी में भी बहुत तेजी से मुड़ने और आगे बढ़ने की ताकत देती है. दुश्मन पर हमला करने के लिए यह जहाज आधुनिक टॉरपीडो, रॉकेट्स, आधुनिक रडार और सोनार प्रणालियों से लैस है. इसका नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवान के नाम पर रखा गया है जो छत्रपति शिवाजी महाराज की महान समुद्री विरासत से जुड़ा हुआ है.

भारत कैसे बन रहा है वॉरशिप की ग्लोबल फैक्ट्री

इस युद्धपोत का तैयार होना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारत अब युद्धपोत बनाने के मामले में पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी ताकत बनता जा रहा है. ‘मालवान’ में अस्सी प्रतिशत से भी ज्यादा स्वदेशी उपकरणों और प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है. इसका मतलब यह है कि इस जहाज को बनाने के लिए जरूरी ज्यादातर कलपुर्जे और तकनीक भारत के अपने रक्षा उद्योगों और छोटे उद्योगों (MSMEs) द्वारा ही तैयार की गई है.

आज भारत केवल विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय खुद अपनी नौसेना के लिए दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू जहाज और सबमरीन बना रहा है. देश के भीतर युद्धपोत निर्माण की इस रफ्तार को देखकर यह साफ हो गया है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ एक ग्लोबल वॉरशिप फैक्ट्री के रूप में अपनी पहचान बना चुका है.

××××××××××××××
Telegram Link :
For latest news, first Hand written articles & trending news join Saachibaat telegram group

https://t.me/joinchat/llGA9DGZF9xmMDc1

Share:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *