भारत फीफा वर्ल्ड कप में क्यों नहीं खेल रहा? यह सवाल हर चार साल बाद पूछा जाता है और जैसे ही वर्ल्ड कप का समापन होता है भारतीय भागीदारी पर पूछे जाने वाले सवाल भी थम जाते है l अर्थात हम भारतीय सिर्फ मौके पर चौका मारने का प्रयास तो करते है लेकिन देश की सरकार, खेल मंत्रालय और फुटबाल फेडरेशन से फिर कभी भारतीय फुटबाल की हालत से जुड़े सवालों में रूचि नहीं लेते l बेशक़, फुटबाल के प्रति गंभीरता की कमी, देश में फुटबाल का कारोबार करने वाली AIFF, तमाम कोच, खिलाड़ी, अभिभावक और अन्य भी दोषी है l लेकिन जैसे ही अगला वर्ल्ड कप आता है सभी जैसे नींद से जाग जाते हैं और पहला सवाल होता है भारत कहाँ है? कहाँ है 150 करोड़ की आबादी वाला देश? जब डेढ़ लाख की आबादी वाला देश खेल रहा है तो भारत क्यों नहीं खेल पाता?
यह भी कटु सत्य है कि वर्ल्ड कप में खेल रहे सभी 48 देशों की कुल आबादी भी अपने महान देश के बराबर नहीं होगी l
भले ही फीफा ने भाग लेने वाले देशों की संख्या बढाई (48) है लेकिन यदि यह संख्या 100 भी कर दी जाए तो भी हम शायद ही खेल पाएं l इसलिए क्योंकि हमारी नीयत में खोट है, सुविधाओं की कमी है, खेल के प्रचार प्रसार की तरफ कम ध्यान दिया जाता है और ट्रेनिंग अपढ़ गँवार कोच दे रहे हैं l छोटी उम्र से शिक्षण प्रशिक्षण की बातें जरूर की जाती हैं लेकिन स्कूल स्तर पर फुटबाल का हाल बेहाल है l देश का स्कूल गेम्स फेडरेशन भ्र्ष्टाचार और राजनीति का शिकार है तो कॉलेज खेलों की और भी बुरी हालत है l रही सही कसर देश में चल रही लुटेरी फुटबाल अकादमियां पूरी कर रही हैं l यह भी पता चला है कि श्रेष्ठ और असरदार होने का दम भरने वाली अकादमियाँ फुटबाल सिखाने की एवज में खिलाड़ियों से लाखों कमा रही हैं लेकिन एक भी दमदार खिलाड़ी क्यों तैयार नहीं कर पातीं? इन अकादमियों की कृपा से देश में उम्र की धोखाधड़ी भी जम कर हो रही है l अर्थात जब खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में आता है तो बूढा हो चुका होता है l तब तक उसे अकादमी के भ्रष्ट पूरी तरह निचोड़ चुके होते हैं l
अब जरा उस मीडिया की बात भी कर ली जाए जोकि फुटबाल वर्ल्ड कप शुरू होने से कुछ पहले नींद से जागने का नाटक करता है, पगला जाता हैl l उसके सर पर फुटबाल का भूत नाचने लगता है l हिंदी, अंग्रेजी, तमाम भारतीय भाषाओं के अख़बारों के फुटबाल एक्सपर्टस यकायक हरकत में आ जाते हैं और फीफा वर्ल्ड कप का अपने अपने तरीके से बलात्कार करते हैं l सोशल मीडिया अनाप शनाप ज्ञान बांटता है तो प्रिंट सिर्फ और सिर्फ फुटबाल पर कुर्बान हो जाता है l लगभग तीन साल दस महीने तक क्रिकेट का स्तुतिगान करने वाले भारतीय मीडिया के फुटबाल एक्सपर्ट मेस्सी, रोनाल्डो, नेमार, एम्बापे, होलैंड और अन्य खिलाड़ियों और टीमों का गुणगान कर अपना फुटबाल ज्ञान बघारते हैं l सोशल मीडिया पर फीफा और उसके ज्ञानी ध्यानी रेफरियों का बलात्कार किया जाता है l ऐसा ज़ाहिर करते हैं कि जैसे उनसे बड़ा फुटबाल पंडित दुनिया में कहीं नहीं है l अरे निक्कमों कभी भारतीय फुटबाल की भी खबर लो l कभी सरकार, खेल मंत्रालय और मृतवत फुटबाल फेडरेशन से तो पूछो कि भारत कब वर्ल्ड कप खेलेगा!
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
