भारतीय महिला हॉकी ने पिछले कुछ सालों में भले ही बड़े तीर नहीं चलाए, पदक नहीं जीते लेकिन फिलहाल महिला हॉकी की गतिविधियों को लेकर देश की हॉकी को संचालित करने वाली हॉकी इंडिया अपने कुकर्मों को लेकर विवादों में घिरी है l ‘बेटी बचाओ, बेटी खिलाओ’ का नारा देने वाली सरकार, भारतीय खेल प्राधिकरण और देश का खेल मंत्रालय देश के खिलाड़ियों को किस प्रकार की सुरक्षा दे रहे हैं हाल के एक शर्मनाक प्रकरण से पता चल जाएगा, जिसके केंद्र में हॉकी इंडिया का महासचिव भोला नाथ है जोकि सालों से विवादों के जन्मदाता के रूप में जाने जाते हैं l
वही भोला नाथ जोकि हॉकी में घुसपैठ से पहले पहलवान थे, झाड़खण्ड कुश्ती के अध्यक्ष बने, फिर हॉकी में पलटी खाई और झाड़खण्ड हॉकी के रास्ते राष्ट्रीय हॉकी में घुसपैठ कर हॉकी इंडिया के महासचिव बन गए l फिलहाल भोला नाथ भारतीय महिला हॉकी की पूर्व कप्तान असुन्ता लकड़ा के निशाने पर हैं l असुन्ता ने लगभग तीस महिला खिलाड़ियों से दुर्व्यव्हार और उनके शरीरिक शोषण का मामला उठा कर झाड़खण्ड सरकार और देश के खेल मंत्रालय को जगाने का प्रयास किया तो भोले नाथ रुष्ट हो गए हैं l अब पूछा जा रहा है कि पहलवान का हॉकी में क्या काम?
यह सवाल बार बार पूछा जाता रहा है कि आखिर एक पहलवान हॉकी की राष्ट्रीय इकाई में कैसे घुसपैठ कर गया और कैसे राष्ट्रीय महासचिव पद पर जा बैठा l यह चर्चा का विषय है जिसे यह कह कर टाला जा सकता है कि “भारत जैसे न्याय प्रिय, खेल संस्कृति से लबालब, स्त्री सम्मान में अग्रणी और उनके प्रति आदरभाव रखने वाले महान देश में कुछ भी हो सकता है”l तारीफ की बात यह है कि एक तरफ तो हम महिला सम्मान की बात करते हैं, देश की बेटियों को खेलों से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के दावे करते हैं तो दूसरी तरफ महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा पर आन पड़ी है l सवाल यह पैदा होता है कि भोला नाथ महिला यौन उत्पीड़न के मामलों को दबाने के लिए क्यों दबाव बना रहे हैं? उनका मकसद क्या है? अफ़सोस इस बात का भी है कि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की भी गंभीर नहीं हैं l बस इतना भर कहते हैं कि दोनों पार्टी से बात करूँगा l
तो क्या भोला ने दिलीप की कोई दुखती रग पकड़ ली है? यह जग जाहिर है कि दिलीप और भोला नाथ के बीच के सम्बन्ध मधुर नहीं हैंl लेकिन लंबे समय से महिला हॉकी खिलाड़ी अपनी सुरक्षा को लेकर अनुनय विनय करती आ रही हैं l कुछ पूर्व खिलाड़ियों के अनुसार तमाम खेलों में यह सब चल रहा है क्योंकि न्याय नहीं मिलता, उनकी आवाज दबा दी जाती है इसलिए बहुत सी खिलाड़ी समय से पहले खेल छोड़ देती हैं l कुछ खिलाड़ियों ने खेल मंत्रालय और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री तक आवाज उठाने की कोशिश की लेकिन देश की बेटियों को खेलने और मैदान में उतरने का लोभ लालच देने वालों के कान बहरे हो गए हैं l उनके नारे कोरा झूठ बन कर रह गए हैं, ऐसा पीड़ितों का मानना है l
यह सही है कि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और महासचिव के बीच पटरी नहीं बैठती l दोनों सम्बन्ध 36 के बताए जाते है l तो फिर असंता और पीड़ित खिलाड़ी किस के आगे फरियाद करें, खेल मंत्री और सरकार को जवाब तो देना ही होगा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
