पाकिस्तान में एक प्रमुख इस्लामी विद्वान द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दिए गए फतवे ने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा स्वरूप में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि इसमें अत्यधिक अनिश्चितता और जोखिम है, इसलिए इसे ‘हराम’ की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
मुफ्ती का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। कई बार इसकी वैल्यू कुछ ही घंटों में काफी बढ़ या घट जाती है। उनके मुताबिक, इस तरह की अनिश्चितता और सट्टेबाजी जैसी स्थिति इस्लामी वित्तीय सिद्धांतों के खिलाफ मानी जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निवेश या लेन-देन में पारदर्शिता, स्थिरता और वास्तविक आर्थिक आधार होना जरूरी है। उनका मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी में इन पहलुओं को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। इसी वजह से उन्होंने लोगों को इसमें निवेश करने से बचने की सलाह दी है।
हालांकि, इस मुद्दे पर सभी इस्लामी विद्वानों की राय एक जैसी नहीं है। दुनिया के अलग-अलग देशों में कई धार्मिक विशेषज्ञ क्रिप्टोकरेंसी को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। कुछ का मानना है कि यदि इसका उपयोग कानूनी और पारदर्शी तरीके से किया जाए, तो इसे पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता।
दूसरी ओर, क्रिप्टो समर्थकों का कहना है कि यह आधुनिक तकनीक पर आधारित एक नई वित्तीय व्यवस्था है, जो भविष्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकती है। उनका तर्क है कि किसी भी नई तकनीक को समझने और उसके लिए स्पष्ट नियम बनाने की जरूरत है, न कि उसे पूरी तरह खारिज करने की।
पाकिस्तान में भी सरकार और नियामक संस्थाएं डिजिटल संपत्तियों और क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नीतियां तैयार करने पर विचार कर रही हैं। ऐसे में यह फतवा धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग राय मौजूद हैं। जहां कुछ लोग इसे भविष्य की तकनीक मानते हैं, वहीं कुछ विशेषज्ञ और धार्मिक विद्वान इसके जोखिमों को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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