भारत फीफा वर्ल्ड कप में क्यों नहीं खेल पाता? इस सवाल का जवाब देश का मीडिया अपने अपने अंदाज़ में दे रहा है l कोई फुटबाल फेडरेशन को गाली देता है, किसी को देश के नेताओं से नाराजगी है, कोई व्यवस्था की खामियों का रोना रोता है तो कुछ एक को लगता है कि साधन सुविधाओं की कमी और नाकारा कोचिंग सिस्टम फुटबाल को पनपने नहीं दे रहे l पता नहीं आप क्या सोचते हैं लेकिन भारतीय फुटबाल चारों तरफ से ऊँची पहुँच वालों, नीची सोच वालों, लुटेरों और प्रतिभावों के हत्यारों से घिरी हुई है l इन सब समस्याओं से कैसे निपटा जाए यह सवाल वर्ल्ड कप के चलते हर एक फुटबाल प्रेमी को खाए जा रहा है l
हाल ही में ‘बे बात की बात’ करने वाले सोशल मीडिया पर एक काम की बात पढ़ने -सुनने को मिली, जिसका सम्बन्ध जापान से है जिसने 1992 में शपथ ली थी की उनका देश सौ साल में फीफा वर्ल्ड कप जीत लेगा l तब कुछ फुटबाल जानकारों और विशेषज्ञओं ने जापान की बात को गंभीरता से नहीं लिया था l कुछ एक ने हँसी उड़ाते हुए यहाँ तक कहा कि जापानी यूँ ही फेंक रहे हैं l लेकिन अब हंसी उडाने वालों कि बोलती बंद हो गई है क्योंकि सूर्योदय के देश की फुटबाल का सूर्योदय हो चुका है l वह फीफा रैकिंग में 20वें नंबर पर आ पहुंचा है और कभी भी पहले चार श्रेष्ठ देशों में जगह बना सकता है l भारत की बात करें तो हम अगले सौ सालों में यदि वर्ल्ड कप खेल जाएं और हजार साल में कप जीत लें तो बड़ी उपलब्धि होगी l इसलिए क्योंकि हम नारों, दावों, वादों, झूठ, फरेब, दिखावे, लूट- खसोट,प्रतिभाओं के हनन, चयन की धांधलियों और नेताओं के पावं तले दबी व्यवस्था वाले महान राष्ट्र हैं l हमारे कुछ नेताओं ने बीसवीं सदी में दावा किया था कि भारतीय फुटबाल 21वीं सदी में टॉप फुटबाल राष्ट्र के साथ प्रवेश करेगी और हम विश्व फुटबाल में ब्राज़ील, अर्जेटीना, इटली, स्पेन इंग्लैंण्ड, कोरिया, जापान आदि देशों को कड़ी टक्कर देने लगेंगे l लेकिन पिछले पचास सालों में हमारी फुटबाल उल्टी चाल चलने लगी है l वर्ल्ड कप जीतना तो दूर खेलना भी भारी पड़ गया है l
जापान की बात करें तो उसने हिरोशिमा और नागासाकी की पीड़ा सही है और कड़ी मेहनत, ईमानदारी, देशभक्ति और फुटबाल के प्रति समर्पण से दुनिया का सबसे नेक, ईमानदार, कर्मठ राष्ट्र का सम्मान पाया है l हम कहाँ खड़े हैं, आप खुद फैसला करें तो बेहतर होगा l हां, हम विश्व गुरु तो बन चुके हैं और तेजी से प्रगति करती अर्थव्यवस्था में भी जी रहे हैं l भूख, भ्र्ष्टाचार, बेरोजगारी, मार काट, जातिवाद, दंगे फसाद और तमाम अनियमिततायें हमारे गहने हैं l तो फिर कैसे वर्ल्ड कप खेलेंगे?
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
