तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ईटेला राजेंद्र ने पार्टी के सभी पदों, प्राथमिक सदस्यता और अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के बेहद करीबी माने जाने वाले राजेंद्र का यह कदम राज्य की सियासत में एक नए समीकरण की शुरुआत माना जा रहा है।
ईटेला राजेंद्र हुजूराबाद विधानसभा सीट से विधायक थे। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से बात की और मुख्यमंत्री केसीआर पर कई गंभीर आरोप लगाए।
मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद बढ़ा था विवाद
ईटेला राजेंद्र और मुख्यमंत्री केसीआर के बीच विवाद पिछले कुछ महीनों से लगातार गहरा रहा था। राजेंद्र पर मेडक जिले में कुछ ग्रामीणों की जमीन पर अवैध कब्जा करने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इन आरोपों के सामने आने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया था और मामले की जांच के आदेश दे दिए थे।
बर्खास्तगी के बाद से ही राजेंद्र लगातार पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मुखर थे। उनका कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और झूठे हैं, ताकि उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा सके।
इस्तीफे के बाद केसीआर सरकार पर बोला तीखा हमला**
पार्टी छोड़ने के बाद ईटेला राजेंद्र ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने तेलंगाना सरकार की कार्यप्रणाली पर जमकर भड़ास निकाली:
आत्मसम्मान की लड़ाई: राजेंद्र ने कहा कि तेलंगाना आंदोलन में उन्होंने केसीआर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं के आत्मसम्मान को लगातार ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने इस इस्तीफे को अपनी ‘आत्मसम्मान की लड़ाई’ करार दिया।
प्रगति भवन में तानाशाही: पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास (प्रगति भवन) अब मंत्रियों और विधायकों के लिए भी एक अभेद्य किला बन चुका है। वहां केवल कुछ चुनिंदा अधिकारियों की चलती है और जनप्रतिनिधियों की बात सुनने वाला कोई नहीं है।
मंत्रियों की कोई शक्ति नहीं: उन्होंने दावा किया कि केसीआर कैबिनेट में मंत्रियों के पास कोई वास्तविक शक्ति या स्वतंत्रता नहीं है, और सभी फैसले केवल एक ही जगह से थोपे जाते हैं।
आगे की राह: किस करवट बैठेगी तेलंगाना की राजनीति?
ईटेला राजेंद्र के इस्तीफे के बाद अब हुजूराबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है। राजेंद्र ने साफ कर दिया है कि वे दोबारा चुनाव मैदान में उतरेंगे और हुजूराबाद की जनता के बीच जाकर न्याय मांगेंगे।
राजनीतिक गलियारों में मजबूत चर्चा है कि राजेंद्र जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी हालिया मुलाकातों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। यदि वे भाजपा का दामन थामते हैं, तो आगामी उपचुनाव टीआरएस और बीजेपी के बीच एक बेहद दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल मुकाबला बन जाएगा, जिसका असर राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ना तय है।
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