‘भारत इतिहास रचने की दहलीज़ पर’, युवा टाइग्रेसेज़ ने लेबनान को हराया’l यह खबर खूब वायरल हो रही है l ए एफ सी अंडर 17 विमेंस एशिया कप के ग्रुप मुकाबले में भारतीय बालिकाओं ने जब लेबनान को 4-0 से परास्त किया तो भारतीय मीडिया ने अपनी खिलाड़ियों को हऱ एंगल से प्रोत्साहित किया l उन्हें इस कदर प्रचारित किया जा रहा है जैसे कि उन्होंने कोई बड़ा ख़िताब जीत लिया हो l इसे पागलपन कहना गलत नहीं होगा l लेकिन क्या किया जा सकता है जब डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाला देश 55 लाख की जनसंख्या वाले लेबनान पर जीत पाता है तो जश्न तो बनता है l 21 साल बाद भारतीय लड़कियों ने इस टूर्नामेंट में कोई जीत दर्ज की है l इस ख़ुशी के अवसर पर देश की भ्रष्ट और नाकारा फुटबाल फेडरेशन भी खूब वाह वाह लूट रही है l
हैरानी सिर्फ जश्न मनाने पर नहीं हो रही l कुछ पूर्व खिलाड़ियों के अनुसार जब जब भारतीय फुटबाल के चारण भाट पुरुष टीम को शेर और महिला टीम को शेरनियां कह कर सम्बोधित करते हैं तो उनका खून खौल जाता है और वे अपनी फुटबाल को लानत भेज देते हैँ l इसलिए क्योंकि साल दर साल भारतीय फुटबाल रसातल में जा रही है l महिला हों या पुरुष दोनों ही टीमें लगातार देश का नाम डुबोती आ रही हैँ l भला महाद्वीपीए आयोजन के क्वार्टर फाइनल में पहुँचने पर कौनसा युद्ध जीत लिया? यह ना भूलें कि फीफा रैकिंग में हमारे पुरुष महारथी 140 वें और शेरनियां 67 वें स्थान के आस पास दहाड़ रहे हैँ लेबनान की महिला रैकिंग 130 वें स्थान की है, जिसे हराने पर हुड़दंग मचा है lसाल दो साल या कभी कभी तो दशकों में कोई मैच जीतने का सौभाग्य प्राप्त होता है और इसके साथ ही बड़बोलेपन का खेल भी चल निकलता हैl
लेकिन दोष खिलाड़ियों का नहीं है l देश की फुटबाल को बर्बाद करने वाली फेडरेशन में या तो जानकार और समझदार लोगों की कमी है या भ्र्ष्टाचार का खेल खुल कर खेला जा रहा है l उम्र की धोखाधड़ी, मैच फिक्सिंग, सट्टेबाजी और बड़े क्लबों की दादागिरी जैसे आरोप लगाए और मिटाए जाते रहे हैँ l लेकिन फेडरेशन और उसकी सदस्य इकइयों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पडता l
भले ही हमारी शेरनियां कमजोर प्रतिद्वाडियों पर गरज बरस रही हैँ लेकिन पुरुष टीम की हालत लगातार बिगड़ रही है l क्योंकि वे जीतना भूल चुके हैँl इसलिए किसी भी हल्की फुलकी जीत पर देश का भटका हुआ मीडिया हुड़दंग मचा देता है l बेशक, बर्बाद हो रही फुटबाल को अज्ञानी, अल्पज्ञानी और जी हुजूर मीडिया से बच कर रहना होगा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
