मुंबई। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांच के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। बोर्ड की एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और ‘प्रोतोकॉल के उल्लंघन’ की शिकायतें मिलने के बाद खिलाड़ियों के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं। इस बार बोर्ड का मुख्य फोकस खिलाड़ियों को ‘हनी ट्रैप’ और बाहरी लोगों के अनचाहे संपर्क से बचाना है।
बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि खेल की गरिमा और खिलाड़ियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए होटल से लेकर मैदान के डगआउट तक, बाहरी लोगों की एंट्री पर लगभग ताला लगा दिया गया है।
होटल रूम में अब ‘नो एंट्री’
बोर्ड द्वारा सभी फ्रेंचाइजी को भेजी गई नई एडवाइजरी के मुताबिक, खिलाड़ियों के निजी स्पेस को अब पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया है।
बिना परमिशन मुलाकात नहीं: अब कोई भी रिश्तेदार या दोस्त टीम मैनेजर की लिखित अनुमति के बिना किसी खिलाड़ी के कमरे में नहीं जा पाएगा।
लॉबी में ही होगी बात: अगर खिलाड़ी को किसी से मिलना है, तो वह केवल होटल की लॉबी या सार्वजनिक स्थानों पर ही मिल सकेगा। होटल रूम में किसी बाहरी व्यक्ति का पाया जाना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
औचक निरीक्षण: बोर्ड की टीमें किसी भी समय होटल में ‘सरप्राइज चेक’ कर सकती हैं।
टीम मालिकों और प्रतिनिधियों पर भी नजर
मैच के दौरान अक्सर देखा जाता है कि टीम मालिक और उनके करीबी डगआउट या ड्रेसिंग रूम के पास खिलाड़ियों से मिलते हैं। अब बोर्ड ने इस पर भी लगाम लगा दी है।
1. डगआउट से दूरी: मैच के दौरान टीम मालिकों या उनके प्रतिनिधियों को डगआउट और प्लेइंग एरिया में जाने की इजाजत नहीं होगी।
2. सीमित संपर्क: बोर्ड ने उन घटनाओं पर चिंता जताई है जहाँ लाइव मैच के दौरान मालिक खिलाड़ियों के बेहद करीब पहुँच जाते हैं। अब प्रोटोकॉल के तहत एक निश्चित दूरी बनाए रखना अनिवार्य होगा।
क्यों पड़ी इस सख्त कदम की जरूरत?
बीसीसीआई की इस सख्ती के पीछे ‘हनी ट्रैप’ का बढ़ता खतरा एक बड़ी वजह है। बोर्ड का मानना है कि हाई-प्रोफाइल खिलाड़ियों को निशाना बनाकर फंसाने की कोशिशें की जा सकती हैं, जिससे न केवल मैच फिक्सिंग का खतरा बढ़ता है बल्कि खिलाड़ियों की छवि और सुरक्षा पर भी आंच आती है।
हाल ही में कुछ ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं जहाँ खिलाड़ियों के होटल रूम के बाहर अनचाहे लोगों की आवाजाही देखी गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने सुरक्षा अधिकारियों (SLO) को निर्देश दिए हैं कि वे खिलाड़ियों के आने-जाने का पूरा ‘लॉग’ रखें, खासकर देर रात की गतिविधियों पर।
वेपिंग और अन्य प्रतिबंध
सुरक्षा के साथ-साथ अनुशासन पर भी जोर दिया गया है। बोर्ड ने होटल के कमरों और सार्वजनिक क्षेत्रों में खिलाड़ियों द्वारा ‘वेपिंग’ (ई-सिगरेट) के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।
चमक-धमक और ग्लैमर के बीच खिलाड़ियों को विवादों से दूर रखना बीसीसीआई के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। बोर्ड का यह ‘सर्कुलर’ उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो खेल की मर्यादा को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं। अब यह जिम्मेदारी पूरी तरह से टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों की है कि वे इन नियमों का पालन कितनी ईमानदारी से करते हैं।
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