ट्रंप का सीजफायर और हॉर्मुज में बारूद: गनबोट्स के हमले से फिर दहला समुद्री रास्ता

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शांति वार्ता की कोशिशों को लगा बड़ा झटका: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दिखाई आंखें

एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को होने वाली शांति वार्ता की उम्मीदें जता रहे हैं और सीजफायर (युद्धविराम) को विस्तार देने की बात कर रहे हैं वहीं हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आई एक खबर ने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। ट्रंप के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की तेज रफ्तार गनबोट्स ने इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों को अपना निशाना बनाया है। यह घटना दर्शाती है कि ईरान की सरकार और उसकी सेना के बीच या तो तालमेल की भारी कमी है या फिर यह अमेरिका पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी सैन्य रणनीति है।

तेज रफ्तार गनबोट्स ने किया घेराव: जहाजों पर अंधाधुंध फायरिंग

समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब तीन बड़े कार्गो जहाज हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से को पार करने की कोशिश कर रहे थे। IRGC की कम से कम छह से सात सशस्त्र गनबोट्स ने इन जहाजों का घेराव किया। गनबोट्स पर सवार सैनिकों ने पहले जहाजों को रुकने की चेतावनी दी और फिर उनके ऊपरी हिस्सों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक निशाना बनाए गए जहाजों में एक ग्रीक टैंकर और दो अन्य एशियाई देशों के व्यापारिक जहाज शामिल हैं। गनबोट्स ने न केवल फायरिंग की बल्कि जहाजों के काफी करीब जाकर उन्हें रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया।

ट्रंप की ‘गुड न्यूज’ पर भारी पड़ा तेहरान का गुस्सा

अभी कल ही राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार की मीटिंग को लेकर सकारात्मक बयान दिया था लेकिन इस ताजा हमले ने वार्ता की मेज पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि IRGC यह संदेश देना चाहती है कि सीजफायर का मतलब यह नहीं है कि वे अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में ढील देंगे। विशेष रूप से तब जब अमेरिका ने अभी तक ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह नहीं हटाई है। इन गनबोट हमलों के बाद खाड़ी में तैनात अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यह हमला उस समय हुआ है जब कई जहाज ट्रंप के सीजफायर वाले बयान के बाद सुरक्षित महसूस करते हुए आगे बढ़ रहे थे।

भारतीय क्रू और वैश्विक शिपिंग में फिर से दहशत का माहौल

हॉर्मुज में हुई इस ताजा गोलीबारी ने उन भारतीय नाविकों की चिंता बढ़ा दी है जो इस समय इन समुद्री रास्तों पर तैनात हैं। हालांकि इस विशेष हमले में किसी भारतीय जहाज के सीधे तौर पर शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय चालक दल में भारतीयों की बड़ी संख्या को देखते हुए विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जहाजों के वापस लौटने और गनबोट्स के इस दुस्साहस ने लॉजिस्टिक्स कंपनियों को फिर से अपने ऑपरेशन रोकने पर मजबूर कर दिया है। अगर शांति वार्ता से पहले इस तरह की हिंसा जारी रही तो शुक्रवार को होने वाली बातचीत केवल कागजों तक सीमित रह सकती है। दुनिया अब यह देख रही है कि ट्रंप इस ‘बैड न्यूज’ पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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