सूरज ढलने के बाद भी नहीं मिल रही राहत: जानिए क्या है इस ‘नाइट टाइम हीटवेव’ की असली वजह
भारत के कई हिस्सों में इन दिनों एक अजीब और परेशान करने वाला बदलाव देखा जा रहा है। आमतौर पर माना जाता है कि सूरज ढलने के बाद वातावरण ठंडा हो जाता है और रातें सुकून भरी होती हैं लेकिन अब स्थिति इसके उलट हो गई है। देश के बड़े शहरों में रात का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसे ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ कहा जाता है। दिन भर कंक्रीट की इमारतें सड़कें और डामर सूरज की गर्मी को सोख लेते हैं और रात के समय इसे वापस वातावरण में छोड़ते हैं। इसके अलावा बढ़ता प्रदूषण और हरियाली की कमी उस गर्मी को आसमान में जाने से रोक देती है जिससे रातें दिन की तरह ही तपती महसूस होती हैं।
सेहत पर भारी पड़ रही गर्मी: कम नींद और चिड़चिड़ापन बन रहे नई बीमारी
बढ़ते रातों के तापमान का सीधा असर हमारी सेहत और जीवनशैली पर पड़ रहा है। जब रात के समय शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता तो हमारी ‘सर्कैडियन रिदम’ यानी शरीर की आंतरिक घड़ी बिगड़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी नींद के लिए शरीर के तापमान का कम होना जरूरी है लेकिन गर्म रातों की वजह से लोग गहरी नींद नहीं ले पा रहे हैं। नींद की कमी के कारण लोगों में मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। ऑफिस हो या घर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और एकाग्रता की कमी इसके सामान्य लक्षण बन गए हैं। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो रही है।
हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा
यह केवल बेचैनी का मामला नहीं है बल्कि गर्म रातें हमारे दिल की सेहत के लिए भी घातक साबित हो रही हैं। जब रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है तो हमारे दिल को शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है और दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। शोध बताते हैं कि जिन रातों में गर्मी ज्यादा होती है उन दिनों हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। विशेष रूप से बुजुर्गों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। शरीर में पानी की कमी और रात भर पसीना आने से इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बिगड़ जाता है जो हाई ब्लड प्रेशर को और बढ़ावा देता है।
सुकून की तलाश: कब और कैसे मिलेगी इस भीषण गर्मी से राहत
सवाल यह है कि आखिर इस स्थिति से कब राहत मिलेगी। मौसम विभाग के अनुसार मानसून आने तक इस तरह की तपती रातों से पूरी तरह छुटकारा मिलना मुश्किल है। हालांकि हम व्यक्तिगत स्तर पर कुछ सावधानियां बरतकर सुकून पा सकते हैं। सोने से पहले कमरे में वेंटिलेशन का ध्यान रखें और हल्के सूती कपड़े पहनें। शाम के समय हल्का भोजन करें और शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं। लंबे समय के समाधान के रूप में हमें अपने शहरों में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे और कंक्रीट के जंगल को कम करना होगा। जब तक हम प्रकृति के साथ संतुलन नहीं बनाएंगे तब तक ये तपती रातें हमारी नींद और सेहत को इसी तरह प्रभावित करती रहेंगी।
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