फर्जी खेल पत्रकार, सबसे बड़ी चुनौती

Sports News 92

देश खेल महाशक्ति बनने जा रहा है। यह हम नहीं कह रहे हैं। भारत सरकार, खेल मंत्रालय, खेल प्राधिकरण और तमाम खेल महासंघ इस दावे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। फिलहाल यह कहना न्यायसंगत नहीं होगा कि अब तक हमने प्रमुख खेल राष्ट्र बनने की दिशा में कितने कदम बढ़ाए हैं, कितनी दूरी तय की है। लेकिन यह वास्तविकता है कि समाचार पत्र-पत्रिकाओं और सोशल मीडिया के चाल-चलन से नहीं लगता कि देश के खेल सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि खेल पत्रकारिता पर छद्म पत्रकार हावी हो गए हैं।
छद्म पत्रकारों से तात्पर्य उन महानुभवों से है, जिनका खेल और खिलाड़ियों से कोई लेना-देना नहीं है। उनका काम प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज करना, लंच-डिनर का लुत्फ उठाना और यदि आयोजक मेहरबान हो जाए, पीआर एजेंसी की कृपा हो तो छीन-झपट कर औने-पौने दाम का कोई गिफ्ट अर्जित करना होता है।

अक्सर यह देखने में आया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें बांटने वाले तथाकथित पत्रकार संवाददाता सम्मेलनों का माहौल बिगाड़ते हैं। अनेकों बार पांच सितारा होटलों में मारपीट और माहौल बिगाड़ने की घटनाएं घटित होती हैं। गिफ्ट के लिए छीन-झपट, मेजबान के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट जैसी शर्मनाक घटनाएं आम हैं, जिसके लिए इवेंट कवर करने वाली पीआर एजेंसी भी काफी हद तक गुनहगार पाई जाती है। मेजबान को गुमराह करने और उसे लूटने के लिए भीड़ जुटाने और मोटा कमाने की हवस के चलते पांच सितारा होटलों में अनेकों बार हुड़दंग मचते देखा गया है।

डिजिटल और सोशल मीडिया का फर्जीवाड़ा अनेकों बार आयोजकों के लिए सिरदर्द बनता आया है, जिसकी रोकथाम जरूरी है। आयोजक, प्रायोजक और वास्तविक पत्रकारों के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया का अतिक्रमण कभी-कभार इस कदर घातक बन जाता है कि नौबत पुलिस बुलाने तक आ जाती है। ऐसा सिर्फ बड़े महानगरों में नहीं हो रहा। छोटे-बड़े शहरों के संवाददाता सम्मेलनों में फर्जी पत्रकारों की बढ़ती तादाद बड़ी समस्या बनती जा रही है।

इस समस्या का हल खोजने के लिए देश भर के प्रिंट मीडिया को एकजुट होने की जरूरत है। संभव हो तो स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन (एसजेएफआई) और उसकी सदस्य इकाइयों को एक राय और एकजुटता से प्रयास करने होंगे। वरना वह दिन दूर नहीं, जब देश की खेल पत्रकारिता पर घुसपैठिये हावी हो जाएंगे।

जरूरत इस बात की है कि खेल पत्रकारों की मान्य राष्ट्रीय इकाई (एसजेएफआई) दिल्ली की मेजबानी में होने वाली आगामी राष्ट्रीय अधिवेशन में कोई ठोस निर्णय ले और प्रिंट मीडिया को घुसपैठियों से बचाने की दिशा में सर्वमान्य कदम उठाए। फिलहाल डीएसजेए ने समस्या की गंभीरता को समझते हुए सदस्यता अभियान शुरू किया है और लगभग 150 पत्रकारों को सदस्य बनाया है। सदस्यों को बकायदा आई-कार्ड (पहचान पत्र) जारी किए गए हैं, जो कि इस बात का प्रमाण है कि कार्डधारी मान्य पत्रकार है। यदि अन्य इकाइयां भी डीएसजेए का अनुसरण करें तो एक बड़ी समस्या का हल स्वत: ही निकल सकता है।

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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