भारतीय हॉकी आज जहाँ खड़ी है वहां से ऊपर जाने और नीचे लुढ़कने के अवसर लगभग बराबर हैं l ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि विश्व के प्रमुख हॉकी राष्ट्र में अब हमारी गणना नहीं होती और सबसे निचले पायेदान से भी थोड़ा ऊपर हैं l जहाँ तक दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल की बात है तो भारतीय फुटबाल भले ही कभी प्रमुख फुटबाल रष्टरों में शामिल नहीं थी लेकिन लेकिन हालत इतनी भी ख़राब नहीं थी कि कोई भी एरा गैरा लतिया कर चला जाए l हॉकी ओलम्पिक गोल्ड जीते 45 साल हो चुके हैं तो विश्व विजेता 50 साल पहले थे l अर्थात साल दर साल हॉकी में पिछड़ते चले गए तो फुटबाल में हवा फुस्स हो चुकी है l
एथलेटिक में भले ही मिल्खा सिँह, उषा और कुछ अन्य ने देश को मान सम्मान दिलाया लेकिन ओलम्पिक गोल्ड सालों बाद अभिनव बिंद्रा और नीरज चोपड़ा जीत पाए l अन्य खेलों में कुश्ती, मुक्केबाजी, वेट लिफ्टिंग, बैडमिंटन और टेनिस में कामयाबी मिल पाई l कुल मिला कर छुट पुट सफलताओं को छोड़ दें तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सफलता रिकार्ड बेहद खराब रहा है l इसलिए क्योंकि हमारे पास अव्वल दर्जे के कोच नहीं रहे और उनकी संख्या और क्वालिटी लगातार घट रही है l कुश्ती में जैसा कद गुरु हनुमान का था उस दर्जे के कोच बहुत कम हुए हैं पी टी उषा के कोच नम्बियार एथलेटिक के जाने माने कोच थे तो मुक्केबाजी में ओ पी भारद्वाज, फुटबाल में रहीम, बैडमिंटन में पुलेला गोपी चंद, हॉकी में बालकिशन और बलदेव सिँह आदि गुरुओं क़ी पारखी नज़रों ने कुछ एक खेलों में चैंपियन खिलाड़ी तैयार किए l भले ही अधिकांश गुरु खलीफाओं के पास कोचिंग के बड़े डिग्री डिप्लोमा नहीं थे लेकिन उन्होंने अपने अल्प ज्ञान और सम्पूर्ण समर्पण से मिट्टी में हीरे तालाशेl दूसरी तरफ सरकारी साधन सुविधाओं का सुखभोग करने वाले अधिकारीयों के चाटुकार, ऊँची पहुँच और रिश्वत खोरी से कोचिंग का गीदड़ पट्टा धारण करने वाले फ़र्ज़ी कोच सीढियाँ दर सीढियाँ चढ़ते गए और भारतीय खेलों को धड़ाम से नीचे गिरा दिया l
भर्तीडी खेलों में नियुक्त ज्यादातर कोचों पर सरसरी नज़र डालें तो उनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने शायद ही कभी कोई खेल खेला हो l ऐसे अपढ़ और ऊँची पहुँच वाले वोच जब खिलाड़ियों को सिखाएंगे पढ़ाएंगे तो कैसे रिजल्ट आएँगे सहज़ अनुमान लगाया जा सकता है l ऐसे ही कोचों ने भारतीय खेलों क़ी बर्बादी में प्रमुख भूमिका का निर्वाह किया है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
