निपाह वायरस क्या है? भारत के बाद चीन में बढ़ी सतर्कता, बीजिंग एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू

Nipah Virus

एक बार फिर निपाह वायरस ने एशिया में चिंता बढ़ा दी है। भारत में पहले ही इसके मामलों को लेकर अलर्ट जारी किया जा चुका था और अब चीन में भी इसके खतरे को देखते हुए बीजिंग ने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। सवाल यही है कि निपाह वायरस आखिर है क्या, यह कितना खतरनाक है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है?

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस (Nipah Virus) एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका पहला मामला 1998 में मलेशिया में सामने आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वायरस का प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट्स) होते हैं।

यह कैसे फैलता है?

निपाह वायरस कई तरीकों से फैल सकता है:

संक्रमित चमगादड़ों के संपर्क में आने से

चमगादड़ों द्वारा खाए गए या गिरे फलों को खाने से

संक्रमित जानवरों (जैसे सूअर) से

संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से

इसी वजह से यह वायरस तेज़ी से फैलने की क्षमता रखता है।

लक्षण क्या होते हैं?

निपाह वायरस के लक्षण शुरू में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले सकता है:

बुखार

सिरदर्द

उल्टी और चक्कर

सांस लेने में दिक्कत

गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस)

कुछ मामलों में यह वायरस जानलेवा भी साबित हो सकता है।

कितना खतरनाक है निपाह वायरस?

डॉक्टरों के मुताबिक, निपाह वायरस की मृत्यु दर काफी ज्यादा होती है। अब तक सामने आए मामलों में यह 40 से 75 प्रतिशत तक रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसका कोई पुख्ता इलाज या वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं है।

चीन में क्यों बढ़ी सतर्कता?

भारत में मामलों की खबरों के बाद चीन ने एहतियातन कदम उठाए हैं। बीजिंग समेत कई बड़े शहरों के हवाई अड्डों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है ताकि किसी भी संदिग्ध मामले को समय रहते रोका जा सके।

बचाव कैसे करें?
बिना धुले फल खाने से बचें

बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से दूरी रखें

हाथों की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें

बुखार या संदिग्ध लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

निपाह वायरस कोई नया खतरा नहीं है, लेकिन इसकी गंभीरता और तेज़ फैलाव इसे बेहद खतरनाक बनाता है। भारत के बाद चीन द्वारा उठाए गए कदम साफ संकेत देते हैं कि दुनिया अब इस वायरस को हल्के में नहीं ले रही। सतर्कता और सही जानकारी ही इससे बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।

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