माघ मेले के दौरान एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर अचानक हंगामा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लाठी-डंडों के साथ कुछ लोग शिविर क्षेत्र में घुस आए और वहां मौजूद सेवकों से धक्का-मुक्की और हाथापाई की।
अचानक बिगड़ा माहौल
बताया जा रहा है कि यह घटना उस वक्त हुई जब शिविर में सामान्य गतिविधियां चल रही थीं। अचानक बाहर से शोर-शराबा सुनाई दिया और कुछ ही पलों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सेवकों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि घुसे लोगों ने आक्रामक रवैया अपनाया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
सेवकों ने लगाए आरोप
शिविर से जुड़े लोगों का कहना है कि हमला बिना किसी उकसावे के किया गया। सेवकों के अनुसार, उनके साथ न सिर्फ बदसलूकी हुई, बल्कि उन्हें डराने-धमकाने की भी कोशिश की गई। घटना में कुछ सेवकों को हल्की चोटें आने की बात भी सामने आई है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और मेला प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने का भरोसा भी दिया गया है।
संत समाज में नाराज़गी
इस घटना के बाद संत समाज में नाराज़गी देखी गई। कई संतों और शिविर प्रतिनिधियों ने माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में ऐसी घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
माघ मेला आस्था और शांति का प्रतीक माना जाता है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की अराजकता दोबारा न हो और मेले की गरिमा बनी रहे।
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