मेरीकोम अब मुक्केबजों की आदर्श नहीं रही!

Mary kom

मेरीकाम भारतीय खेल इतिहास का वह अध्याय बन चुकी है जिसे पढ़ने लिखने में अब किसी की रूचि बाकी नहीं रही है l रोज ही उसके बारे मेंऐसा बहुत कुछ निकल कर आ रहा है जिसे पढ़ने समझने में भारतीय खेल जगत की थू थू में बढ़ोतरी हो रही है l लेकिन मेरी काम के हमाम में नंगों की भरमार है और आने वाले दिनों में कई जाने पहचाने चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं l ऐसे चेहरों में भारतीय मुक्केबाजी फेडरेशन, उसके कोच, कई बड़े कद वाले पदाधिकारी, आयोजक और प्रायोजक आदि के नाम भी विवाद में घसीटे जा सकते हैं l

हालांकि मेरिकोम का नाम एक डर और दहशत का पर्याय माना जाता है लेकिन कुछ कोच और पूर्व मुक्केबाजों ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर कहां कि मेरीकोम ओलम्पिक पदक जीतने के बाद से सुपर स्टार बन गई थी l खेल और खिलाड़ियों से जुड़े बहुत से फैसले उसके इशारे पर तय होने लगे थे l इतना ही नहीं राष्ट्रीय खेल आवार्डो की बंदरबाँट का खेल भी उसके इशारे पर तय होने लगा था l कौन मुक्केबाज एशियाड और ओलम्पिक जैसे आयोजनों में भाग लेगा और किस कोच का नाम द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए भेजा जाएगा, जैसे फैसले भी उसकी पसंद से लिए जाने लगे थे l

कुछ मुक्केबजों और कोचों ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि मेरीकोम ने जिसे चाहा उसे द्रोणाचार्य अवार्ड मिल गया, क्योंकि भारतीय मुक्केबाजी में वह एक बड़ी ताकत बन चुकी थी l बहुत से लोग तो यहाँ तक आरोप लगा रहे हैं कि उसकी बायोपिक्स झूठ से प्रेरित हैl गुस्साए लोग फ़िल्म में मेरीकोम की भूमिका निभाने वाली प्रियंका चोपड़ा से भी नाराज हैं क्योंकि उसने और फ़िल्म निर्माता ने मेरीकोम के पीछे छिपे पहलू पर ध्यान नहीं दिया l ऐसे आरोप भी लगे जिनमें उस पर बहुत सी जूनियर लड़कियों के खेल करियर तबाह करने के भी आरोप हैं l यही कारण है कि कल तक जो लड़कियां मेरिकोम बनने के सपने देख रही थीं, अब उसका नाम लेने से भी डरती हैंऔर अपना आदर्श नहीं मानतीl

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