भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर विराट कोहली और घरेलू क्रिकेट को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट जानकारों का मानना है कि BCCI को कोहली पर रणजी या अन्य घरेलू टूर्नामेंट खेलने के लिए ज़ोर नहीं डालना चाहिए, क्योंकि वह जब भी घरेलू स्तर पर उतरते हैं, रन बनाकर अपना काम पूरा करते हैं और फिर अपने निजी जीवन में लौट जाते हैं।
‘कोहली जब आते हैं, रन बनाते हैं’
क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि विराट कोहली की काबिलियत और अनुभव पर किसी तरह का सवाल नहीं उठाया जा सकता। जब भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लिया है, उन्होंने प्रदर्शन से जवाब दिया है। ऐसे में यह तर्क दिया जा रहा है कि सिर्फ औपचारिकता के लिए किसी सीनियर खिलाड़ी को घरेलू क्रिकेट खिलाना सही नहीं है।
लंदन में रहना बना चर्चा का विषय
हाल के वर्षों में कोहली का लंदन में ज्यादा समय बिताना भी चर्चा में रहा है। आलोचकों का कहना है कि वह घरेलू क्रिकेट खेलने आते हैं, कुछ मैच खेलते हैं और फिर वापस चले जाते हैं। वहीं समर्थकों का मानना है कि यह उनका निजी फैसला है, और इससे उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन या टीम के प्रति प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं पड़ता।
युवा खिलाड़ियों को मिलना चाहिए मौका
कुछ क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू क्रिकेट का असली उद्देश्य युवा और उभरते खिलाड़ियों को मौका देना होता है। अगर सीनियर खिलाड़ी सीमित समय के लिए आते हैं, तो यह युवाओं के लिए अवसर कम कर सकता है। इसलिए चयनकर्ताओं को संतुलन बनाकर फैसले लेने चाहिए।
BCCI के सामने संतुलन की चुनौती
BCCI के लिए यह मुद्दा आसान नहीं है। एक ओर फिटनेस और फॉर्म को लेकर नियम बनाए गए हैं, तो दूसरी ओर विराट कोहली जैसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सालों तक भारतीय क्रिकेट को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। बोर्ड के सामने चुनौती यह है कि सम्मान, प्रदर्शन और नियमों के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।
फैंस की भी बंटी हुई राय
फैंस के बीच भी इस मुद्दे पर दो तरह की राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग चाहते हैं कि कोहली घरेलू क्रिकेट में नियमित रूप से खेलें, ताकि युवाओं को उनसे सीखने का मौका मिले। वहीं कई फैंस का मानना है कि कोहली ने खुद को साबित करने के लिए अब कुछ बचा नहीं है।
विराट कोहली और घरेलू क्रिकेट को लेकर यह बहस फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही। लेकिन इतना तय है कि उनकी क्लास, अनुभव और योगदान पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। अब यह BCCI पर निर्भर करता है कि वह नियमों और सीनियर खिलाड़ियों के सम्मान के बीच किस तरह का रास्ता चुनती है।
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