पिछले कुछ सालों से भारतीय खेल आरोप प्रत्यरोपों, गंदी राजनीति, लूट खसोट और नशाखोरी का अखाडा बने हुए हैं l लगभग सभी खेल संघ, सभी संगठन, आईओए और खेलों को नियंत्रित करने वाले सचिवालय अनियमितता और अनिश्चितता के शिकार हैं l खेल बिगड़ रहे हैं और सरकार है कि देश को खेल महाशक्ति बनाने का दम भर रही है l अफ़सोस इस बात का है कि ऊपर के स्तर पर लीपा पोती की जा रही है लेकिन ग्रास रुट पर किसी का भी ध्यान नहीं है l
ग्रास रुट अर्थात स्कूल और कॉलेज के खेल सिर्फ खिलवाड़ और खाना पूरी रह गए हैं l सरकारों का ध्यान अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों, एशियाड और ओलम्पिक पर केंद्रित हो सकता है लेकिन स्कूली खेलों में क्या कुछ हो रहा है, यूनिवर्सिटी स्तर पर खिलाड़ी कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं और आगे चल कर वे कैसे और किस स्तर के खिलाड़ी बनने वाले हैं यह भी जिम्मेदार लोगों के संज्ञान में जरूर होगा l लेकिन क्या स्कूली खेलों को संचालित करने वाली इकाई को देश भर के समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, सोशल मीडिया की उन ख़बरों की जानकारी है, जिनमे भारतीय खेलों के बचपन के साथ हो रहे अन्याय को परोसा जा रहा है?
एक तरफ तो देश को खेल महाशक्ति बनाने का दम भरा जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ आलम यह है कि हमारे भविष्य के चैंपियनों को खचाखच भरी रेलगाड़ियों में ठूँसा जा रहा है, टॉयलेट के बाहर सोना पड़ रहा है l उन्हें ठहरने के लिए बदबूदार कमरे और गंदे बिस्तर दिए जा रहे हैं l इतना ही नहीं देश भर से खिलाड़ियों के साथ धोखा धड़ी, उम्र का फ़र्ज़ीवाड़ा, महिला खिलाड़ियों के साथ बदतमीजी और शारीरिक शोषण तक की ख़बरें मिल रही हैं l नतीजन अभिभावकों का खेलों पर से विश्वास उठ रहा है l उन्हें अपने बच्चों का भविष्य अंधकारमय नज़र आता है l खासकर, महिला खिलाड़ियों के साथ हुए बहुत से दबा दिए गए हादसे डर और भय का कारण हैंl
हॉकी, फुटबाल, तैराकी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक, हैंडबॉल, बास्केटबॉल, कुश्ती और अन्य खेलों में दर्जनों महिला खिलाड़ियों की शिकायतें ठन्डे बस्ते में डाल दी गई हैं l माता पिता और खिलाड़ी चिल्लाते रह जाते हैं लेकिन सरकारों का भ्रष्ट खेल तंत्र, अधिकारी, कोच और सपोर्ट स्टॉफ मौन साधे हैं l इसलिए क्योंकि कई बड़े नाम भी कीचड़ में सने हैं और उन पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाती l लेकिन पिछले दो दशक से डोप का जहर स्कूली और विश्वविद्यालय खेलों की रग रग तक बुरी तरह फ़ैल चुका है l खिलाड़ी नशाखोर हो गए हैं और देश का खेल भविष्य बर्बादी की कगार तक पहुँच गया है l फिरभी दावा यह कि भारत खेल महाशक्ति बन रहा है! दावे करने वालों को जरा भी शर्म आती हो तो राजनीति छोड़ स्कूल, कॉलेज और ग्रास रुट पर अपनी नाकामी का भद्दा चेहरा ज़रूर देख लें l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
