बहुत से मित्रों और खेल प्रेमियों को अक्सर यह शिकायत रहती है कि मैं फुटबाल पर बहुत ज्यादा लिखता हूं और अन्य खेलों की बहुत कम खबर ले पाता हूं l कुछ खेल प्रेमी पक्षपात का आरोप भी लगाते हैं l लेकिन यह ना भूलें कि फुटबाल दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा खेले जाने वाला खेल है, जिसके साथ मेरा जुड़ाव तब से है जब मैंने होश
संभाला था l तब से जब फुटबाल के ब्लेडर की टोटी पूरी तरह कवर नहीं थी और आज जो किट (जूते) 5-10 हजार के मिलते हैं कभी 30 से 100 रूपए में उपलब्ध थे l
वक्त के साथ साथ फुटबाल का रूप स्वरुप बदला, तकनीक बदली, मैदान की शक्ल सूरत में बदलाव हुआ, कोचिंग अत्याधुनिक हुई टीवी कैमरों ने रेफरी का काम आसान किया लेकिन यदि कुछ नहीं बदला तो फुटबाल के प्रति आम इंसान की सोच, फुटबाल से प्यार और समर्पण l भव्यतम स्टेडियम बने, पेले, माराडोना, रोनाल्डो सीनियर, क्रिस्चियानो रोनाल्डो, मेस्सी, और सैकड़ों अन्य खिलाड़ियों ने अपने खेल का कद विशालतम बनाया, जिसके सामने बाकी खेल बहुत बौने होते चले गए और कुछ तो बहुत छोटे नजर आते हैं l बेशक़, तैराकी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक, मुक्केबाजी, कुश्ती, हॉकी क्रिकेट आदि खेलों ने विश्व विख्यात खिलाड़ी दिए हैं लेकिन फुटबाल की बराबरी कोई भी खेल नहीं कर सकता l दुख की बात यह है कि इस खेल में हम आगे बढ़ने की बजाय पिछड़ते गए हैं और आज जीरो के आसपास खड़े हैं l
बेशक़, फुटबाल ने भी अपनी हैसियत को समझा है l यही कारण है कि फुटबाल दुनिया के सबसे बड़े खेल मेले – ओलम्पिक
का हिस्सा है लेकिन उसके स्टार खिलाड़ी ओलम्पिक से प्राय दूर रहते हैं और फुटबाल वर्ल्ड कप में खेलते हैं l अर्थात अन्य खेलों के लिए ओलम्पिक से बड़ा कुछ भी नहीं जबकि फुटबाल वर्ल्ड कप जीतना हर फुटबालर का सपना होता है l चूंकि फुटबाल सबसे बड़ा और सबका खेल है इसलिए उसका कद भी बहुत बड़ा है l लेकिन इस खेल में भारत सालों से फिसड्डियों की कतार में खड़ा है और निरंतर पिछड़ रहा है l फुटबाल प्रेमी हैरान परेशान हैंl उनके पास अपनी फुटबाल को कोसने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
