इसरो ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजनाएं सामने रखी हैं। एजेंसी न केवल 2028 में चंद्रयान-4 भेजने की तैयारी कर रही है, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप स्पेसक्राफ्ट उत्पादन क्षमता को अगले तीन वर्षों में तीन गुना करने की दिशा में भी तेज काम कर रहा है ।
Isro के प्रमुख का बयान
Isro प्रमुख ने कहा कि सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है, जिसे चंद्र नमूना-वापसी मिशन के रूप में डिजाइन किया गया है। यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र अभियान होगा। उन्होंने कहा, ‘हमने चंद्रयान-4 के लिए 2028 का लक्ष्य रखा है।’ एक अन्य प्रमुख मिशन लूपेक्स है जो जाक्सा के साथ किया जाने वाला संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण कार्यक्रम है। नारायणन ने कहा कि इसरो मिशन के कारण बढ़ती मांग के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए अगले तीन साल में अपने वार्षिक अंतरिक्ष यान उत्पादन को तिगुना करने पर भी काम कर रहा है।
2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन होगा स्थापित
इसरो भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। नारायणन ने बताया कि 2035 तक स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है और इसका पहला मॉड्यूल 2028 में कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा। गगनयान मिशन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मानवरहित परीक्षणों की टाइमलाइन बदली है, जबकि मानवयुक्त मिशन हमेशा 2027 के लिए ही तय था। तीन मानवरहित उड़ानें इस मिशन से पहले होंगी।
मानवरहित मिशनों की समय में हुआ बदलाव
भारत के पहले मानव-अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान को लेकर नारायणन ने स्पष्ट किया कि केवल मानवरहित मिशनों की समय-सीमा बदली है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मानवरहित मिशन 2025 के लिए लक्षित था। मानवयुक्त मिशन की योजना हमेशा से 2027 के लिए बनाई गई थी और इस तिथि में कोई बदलाव नहीं किया गया है।’ भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पहली उड़ान से पूर्व तीन मानवरहित परीक्षण मिशन होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर भेजने और 2040 तक उन्हें सुरक्षित वापस लाने की दिशा में काम करने का भी निर्देश दिया है।
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