भारतीय फुटबाल महासंघ (ए आई एफ एफ ) के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय प्रिय रंजन दास मुंशी और प्रफुल पटेल फुटबालर नहीं थे लेकिन उनके पद पर रहते भारत की फुटबाल इतनी नहीं गिरी थी, जितना पतन फुटबालर रहे कल्याण चौबे के राज काज में हुआ है l हालांकि चौबे कभी भी बड़े नाम वाले खिलाड़ी नहीं रहे लेकिन अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को बहुत बड़ी लानत के रूप में याद किया जाएगा ‘, एक पूर्व खिलाड़ी की इस टिप्पणी के इसलिए मायने हैं क्योंकि सबसे ज्यादा आबादी बढ़ाने वाला देश फुटबाल जगत में एक्सपोज़ हो गया है l सच तो यह है कि भारतीय फुटबाल आज वहां पहुँच गई है जहाँ से वापसी में सौ साल भी लग सकते हैं l
एशियन चैंपियनशिप के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद अपनी फुटबाल को लतियाने और गरियाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है वह थमने का नाम नहीं ले रहा l पूर्व फुटबालर,कोच, राज्य इकइयों के पदाधिकारी और फुटबाल की गहरी समझ रखने वाले इस कदर खफा हैं कि अध्यक्ष कल्याण चौबे को निकाल बाहर करने की मांग की जाने लगी है l राज्य इकइयों में सालों से जमे बैठे पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है l हरियाणा, हिमाचल, यू पी, एमपी, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, उड़ीसा, बंगाल, महाराष्ट्र, मेघालय, मणिपुर, गुजरात, बिहार और लगभग सभी स्टेट फुटबाल एसोसिएशन से जुड़े क्लब और खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन से नाखुश हैं, जिसके लिए राज्य इकइयों में चल रहे लूट के खेल को दोषी माना जा रहा है l लगभग बीस राज्यों ने अपने स्टेट एसोसिएशन पर खिलाड़ियों के चयन में धांधली, उम्र की धोखाधड़ी और पैसे के दुरूपयोग के आरोप लगाए हैं l यहां तक आरोप है कि उच्च अधिकारी एसोसिएशन का पैसा अपनी निजी अकादमियों पर खर्च कर रहे हैं l
भारतीय खेल प्राधिकरण के एक सेवानिवृत कोच और चयनसमिति के सदस्य (नाम गुप्त रखने में भलाई है ), कुछ पूर्व खिलाड़ियों और पदाधिकारियों के अनुसार भारतीय फुटबाल की बर्बादी के मुख्य कारण हैं – 1- उम्र की धोखाधड़ी 2- चयन में धांधली, 3-चयन समितियों में भ्रष्ट लोगों का दबदबा, 4- कुछ खिलाड़ियों को उनकी काबलियत से अधिक पैसा देना, 5- प्रतिभावानों को अंडर एस्टीमेट करना,6- कुछ खास प्रदेशों का दबदबा 7 – अपने कोचों का तिरस्कार और ऐसे विदेशियों को महत्व देना जोकि शीर्ष खिलाड़ियों से मिली भगत कर खेल को नुक्सान पहुँचाते हैं, 8- फेडरेशन और स्टेट इकइयों में भ्रष्ट लोगों की भर्ती बेहद खतरनाक, 9- जुगाडू कोच बढ़ रहे हैं 10- भारतीय खेल प्राधिकरण का लचर रवैया 11- अत्याधुनिक तकनीक में निपट कोरे 12 क्लब फुटबाल को राष्ट्रीय दाइत्व से ऊपर आँकना और आईएस एल क्लबों की दादागिरी, 13- सच तो यह है कि ज्यादातर खिलाड़ी फुटबाल का पहला पाठ भी ढंग से नहीं सीख पाते l फिर भला फुटबाल का कल्याण कैसे हो सकता है चौबे जी l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
